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समीकरण

samikran

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    कोनो कहब जे

    आब समाजमे

    पाँच जोड़ पाँच बराबर दस भऽ गेलैए

    से बात एखनो नइ भेलैए

    पहिले जे छलैक नौ जोड़ एक

    तँ से आब बरू

    एक जोड़ नौ भेल जा रहलैए।

    हँ, इहो जे कहब जे

    सरकारी अवसर बढिकऽ

    दससँ भऽ गेलै सौ कि हजार

    सेहो बात नै छै।

    मंडलक ओतेक उत्फाल मचलै

    खाली

    बदलय लेल गुणनखंड समीकरण

    सरल समीकरण कयलासँ हल

    जखन भेटि रहल छै मनवांछित फल

    तखन युगपत की क्वाडरेटिकक

    फेरामे पड़बाक छै की

    ककरो कुकुर कटने।

    बाँकी सब जाय भाँड़मे

    ओकरा जतेक छलइ गर्ज

    से तँ सुतारिए लेलक

    अंककेँ अंकसँ भिड़ाइए देलक

    सौंसे बझा देलक टंटा

    आब लैत रहू

    सब गोटा बाबाजीक घंटा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 103)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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