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सम्भावनाक तलाश जारी अछि

sambhavnak talash jari achhi

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

सम्भावनाक तलाश जारी अछि

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    अहूबेर आसमानसँ धधकलै आगि

    तापमान भेलै पचासक लगीच

    गहूमक शीश भेलै फोंक

    ऊपरसँ बिहाड़ि-पानि-पाथर

    रोहनि सोधलकै मूँग

    तपि गेलै मृगशिरा

    बीहनि-बालि जरिकेँ भेलै सुड्डाह

    ठाम-ठीमक बचल काल लागल

    धानक आरिपर

    गमछासँ नोर पोछि रहल गिरहतक

    आँखिक सामने पसरल अन्हरियामे

    ओकरा साफ-साफ देखार पड़ै छै

    बूढ़ माय-बापक संग

    धियापुताक पेट कनियाँक पथरायल आँखि

    अहूबेर दगा देलकै अदरा

    पुरबा नक्षत्रमे पुरबा बहलाक बादो

    व्यर्थ भेलै डाकक कहबी जे

    'जँ पुरबा पुरबैया पाबय

    सुखले नदिया नाह चलाबय'

    तेँ झिंगुर बेंग मीलिकऽ

    नहि गौलक कजरी

    मुदा फाटलै बादल, ढहलै पहाड़

    खसलै बज्जर ठनका

    डोलि गेलै धरती

    नगरक-नगर गेलै रसातलमे

    अहूबेर मजरलै तँ

    आम, लुच्ची, जामु, तेतरि

    तुति, कटहर, बड़हर धरि

    मुदा, फागुनेमे मज्जर चाटि गेलै मधुआ

    तेँ आमक गाछीसँ निपत्ते रहलै कोइलीक बोल

    सुग्गा नहि टेंटिअयलै गाछपर

    डारिपर नहि लागलै मचकी

    कहियो नहि भेलै डोलपत्ताक खेल

    ने गड़लै मचान-खोपड़ि

    ने बनलै आमक भुजिया

    आमिल-अँचार, खटाइ-खटमिट्ठी

    मुदा अहूबेर

    बम्बै मालदह

    चोकरायलै आबि गेलै बजारमे

    से की कहियह भैया—

    ने गुलाबखासमे रंग

    ने जर्दालु सुगंध

    बाँकी सभ निपत्ते रहलै बजारोसँ

    अहूबेर छात्रसभकेँ

    अपन भविष्यपर शंका छनि जे

    प्रशासनिक सेवाक परीक्षाक प्रश्न-पत्रक प्रतिलिपि

    बिका सकैए किराना दोकानपर

    आ, न्याय पेबाक लेल न्यायाधीश लोकनिकेँ

    प्रेस कान्फ्रेंस करबाक भऽ सकैए बेगरता

    अहूबेर गोरक्षाक नामपर

    बलिवेदीपर चढ़ाओल गेलै दलित

    पड़ोसियाक कुव्यवस्थाक सृजनसँ

    मारल गेलै तीन दर्जन शिशु

    आ, हमरा ओहिठाम सृजनक कुव्यवस्था

    लूट-खसोट भेलै अढाइ-तीन हजार करोड़

    सेवाकरक नामपर उजाड़ल गेलै रोजगार

    नोटबंदीसँ मालोमाल भेलै सत्ताधारीक सखा-सहोदर

    अहूबेर कोशीमे उबडुब होइत रहलै लोक

    ठाम-ठीम, ठाम-ठीम कुहरैत रहलै लोक

    बेभरम होइत रहलै लोक

    हवाइ जहाजपर सर्वेक्षण कऽ

    नाङटे जल-समाधि लैत लोककेँ देखिकऽ

    आसमानमे खिलखिलाइत रहल लोक

    अहूबेर सिंहासनक जोगारमे

    एक्के सोन्हिमे साँप-बिज्जीकेँ

    फेंच काढ़ि बैसबाक

    कौशल-कला देखलकै लोक

    पह फाटला पर एकटा बहुरुपियाकेँ

    बैलगोमनाक आगाँ दंडवत करैत देखलकै लोक

    सपनाकेँ बदरंग होइत देखलकै लोक

    अहूबेर देशक समृद्धि बेसाहबाक लेल

    घुमि-फीरि अयलाह समुच्चे दुनियाक बजार

    ओहि बजारकेँ, हमरा सुलतानकेँ

    माने निजाम-ए-हिन्दकेँ

    मनुक्ख नहि, किछु रोबोटक बेगरता छै

    तेँ आब सोनाकेँ पित्तरि मनुक्खकेँ गदहा

    घोषित करबाक

    सम्भावनाक तलाश जारी अछि...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 132)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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