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रिश्तेदारों में जाते हुए

rishtedaron mein jate hue

लता खत्री

अन्य

अन्य

लता खत्री

रिश्तेदारों में जाते हुए

लता खत्री

और अधिकलता खत्री

    रिश्तेदारों में जाते हुए पहनने होते गहने

    खिले रंग के कपड़े

    चूड़ियों से भरे हाथ

    सिर पर पल्लू थोड़ा आगे तक खींचा हुआ

    जातरुओं को फेरी देनी होती

    और भैरू जी को चढ़ाना रहता चूरमा—

    सवा किलो

    मंगतों के लाचारी भरे चेहरे

    चिटक-चिटक परसाद

    धोबा भर चूरमे से भरे हाथ

    तालाब की सीढ़ियों पर बैठा अनमना कुत्ता

    मीठा खाकर अकुलाया हुआ

    लंबे घूँघट में जात देने आई नई दुल्हन

    दूसरी जाति में परणिजा हुआ पढ़ा-लिखा छोरा

    मेला था यहाँ-वहाँ छितराया हुआ

    एक खंडहर की साळ

    थान पर ली गई हर फ़ोटो के बैकग्राउंड में

    निर्लिप्त खड़ी रहती हर बार।

    स्रोत :
    • रचनाकार : लता खत्री
    • प्रकाशन : सदानीरा वेब पत्रिका

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