Font by Mehr Nastaliq Web

रजधनियाँ से आई बा खबरिया

rajadhaniyan se aai ba khabriya

नरेन्द्र कुमार

नरेन्द्र कुमार

रजधनियाँ से आई बा खबरिया

नरेन्द्र कुमार

और अधिकनरेन्द्र कुमार

    लाल किलवा से उड़ले जहजिया ना।

    लाग बाटइ अमरीकवा नजरिया ना॥

    लास माई कऽ देखाइ

    सगरो खूनवाँ बहाइ

    बेटा पाइ गहलें माई कऽ कुरुसिया ना॥

    टीवी मुहवा चिढ़ावइ

    ओकर चेहरा देखावइ

    घिन लागइ देखि हिटलरी सुरतिया ना॥

    नवका सिच्छा कऽ विधान

    बबुआ बदलें संविधान

    हमरे ललना के मोहाल भइ अछरिया ना॥

    आइल पंचाइती राज

    जइसे कोढ़िया मा खाज

    बाजइ देसवा मा लूट कह बँसुरिया ना॥

    जवाहिर रोजगार

    लागइ जरले पे खार

    अब तऽ अउर गइ अकास मा नोकरिया ना॥

    गली-गली मचा सोर

    'पैलट बाबू' होइगै चोर

    रंग लाये अब तोप कइ दललिया ना॥

    बहइ लोहुआ के धार

    एतना कइले अत्याचार

    भरि गइ ओकरे जुलुम कइ गगरिया ना॥

    अब तऽ जनता पगलान—

    काँपइ मुखिया के परान

    रजधनियाँ से आई बा खबरिया ना।

    30.08.1989

    (भारतबंद की ऐतिहासिक सफलता के बाद)

    स्रोत :
    • पुस्तक : अब होगी बरसात (पृष्ठ 76)
    • रचनाकार : नरेन्द्र कुमार
    • प्रकाशन : जन संस्कृति प्रकाशन
    • संस्करण : 1990

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY