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रचनाकार अपरिपक्व मरता है

rachnakar apripakw marta hai

खँगाले-सँभाले जाने चाहिए

एक हालिया मरे कवि की

अधूरी कविताओं के ड्राफ़्ट

ज़रूरी नहीं

कि वे सारी कविताएँ लिखी गई हों

जीवन के अंतिम वर्षों में ही

कुछ अटकी रही होंगी बरसों-बरस

बाट जोहती नदी के कलकल प्रवाह की

और कवि करता रहा होगा प्रतीक्षा

विचार के उस प्रस्थान-बिंदु की

जहाँ वह कविता के चरम पर संतुष्ट हो सके

हाय कि जीवन छोटा पड़ गया

उन वांछित अनुभवों के लिए

अधपकी रचनाएँ बताएँगी

हर रचनाकार

कुछ अपरिपक्व ही मर जाता है

अतृप्त उड़ती है कवि की आत्मा

अंत्येष्टि के फ़ौरन बाद

श्रद्धांजलि-सभा की जगह

ढूँढ़ो अधूरी कविताओं की

उस डायरी या कंप्यूटर के फ़ोल्डर को

वे कविताएँ नक़्शा हैं

उन कोनों-कुजारों का

जहाँ नहीं पहुँच पाया

अरबों वर्ष पुराना सूर्य

जहाँ पहुँचना चाहता था

कुछ दशक जिया कवि

स्रोत :
  • रचनाकार : देवेश पथ सारिया
  • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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