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रचना-प्रक्रिया

rachna prakriya

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

रचना-प्रक्रिया

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    कहलनि वियोगी जी

    हे, दुनू कविक

    रचना-प्रक्रियाकेँ देखहक

    दुनू कविक

    जीवकान्त हरेकृष्ण झाक

    अजूबा कवि भेलाह दुनू

    बुझलिही मयंक

    से की कहियौ रघू बाबू

    जीवकान्तकेँ जखन

    कविता फुराइन तँ

    हुनका कछमच्छी लागि जानि

    केंचुआयल साँप जकाँ

    आ, से कछमच्छी

    ताधरि रहनि

    जाधरि कविताकेँ

    लीखि नहि लैत छलाह

    अजूबा लोक रहै

    अजूबा...

    गर्भाधानक संगे

    प्रसव होयब रहनि जरूरी

    हुनका लेल

    प्रसव वेदना भयावह रहनि हुनका लेल

    कविता मोनमे जनमल

    तँ किलकारी दौक आब जल्दी

    कागजपर

    आ, हिनका देखियनु

    हरेकृष्ण जीकेँ...

    हिनका पर कविता सवार हेतनि तँ

    कविताक गर्भाधान करताह

    से देखहक

    केहन आश्चर्यजनक गप छै

    हुनका प्रसव वेदना नहि होइत छनि

    गर्भावस्थाक

    समय पूर कऽ

    सोइरी अगोरैत छथिन

    सोइरीमे विधिवत

    राखै छथि आगिक बोरसि

    बइरक काँट

    जालक टुकड़ी, खैर

    लौहदण्ड

    छओ दिन धरि

    सुतैत-जागैत, उठैत-बैसैत

    सोझराबै छथिन

    भावी पीढ़ीक सपना

    सादा कागतपर कारी मोसिसँ

    पजारै छथि क्रांतिक मशाल

    थारी पीटि

    सतंजा बाँटि

    नामकरण करैछ

    'भावी पीढ़ीक मार्ग'

    प्रशस्त हो

    से बुझलहक मयंक

    हमरा एहि दुनू कविक

    सिनेह भेटल अछि।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 130)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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