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प्रवंचना

prvanchna

धूमकेतु

धूमकेतु

प्रवंचना

धूमकेतु

और अधिकधूमकेतु

    चानी केर सारी पहिरि

    इजोरिया छमकै अछि

    मुग्धा जनु सासुर बसिकऽ

    नैहर आयलि हो

    भइयाक पाँजसँ छूटलि

    नबकी भौजी सन लचकैत

    हवा केर सिहकी कौखन अबै छै

    प्रकृत-पिया केर देह

    अनावृत सिमसिम सन

    अलसायल मूक निमंत्रण

    व्यापति दिगदिगन्त हिलकोर चलै छै

    अति रहस्यमय अनुभूतिक

    मदमातल चेतन भसिआयल जाइत अछि

    मन-देह-प्राण से समा रहल अछि

    चिरपरिचित अज्ञात अर्ध-कुसुमित

    पुष्पक मादक सुगन्धि

    अवचेतनमे उत्ताप लहरि मारय रहि-रहि

    आलिंगन चिर अतृप्त हमर पियासल अछि

    चानी केर सारी पहिरि

    इजोरिया छमकै अछि

    मुग्धा जनु सासुर बसि

    नैहर आयलि हो

    भइयाक पाँजसँ टुटलि

    नवकी भौजी सन लचकैत

    हवा केर सिहकी कौखन अबै छै

    अंतिम अभावकेँ चक्कूसँ

    कियो रेति रहल अछि

    सुप्त अचेतनक खोइँठी

    ओदरऽ लागल

    इन्द्रियक दसोटा खिड़कीपर

    कुंठा-कुहेस उमड़ऽ लागल

    अस्तित्वक मूलाधार

    इमारल, थाकल सनक होमऽ लागल

    प्रायः देहक

    रुधिर मांस हड्डी चमड़ी

    अपने सन किछु सत्य

    असल मंड़यै छै

    बिनु जकर

    रिक्त कातर अनाथ अन्तस्तलमे

    अज्ञात तप्त किछु

    मारि अहुरिया घुमड़ै छै

    अन्तर्वासिनी! सत्य

    चतुर्दिक तोहरे माया पसरल छह

    किन्तु होयब

    रूप-गंध-रस युक्त जखन धरि

    किछु दोसर बनि

    एकाकार ने होयब जा धरि

    ता धरि मानव मर्त्य रहत

    एकसरे प्रवंचित।

    स्रोत :
    • संपादक : बालमुकुन्द
    • रचनाकार : धूमकेतु
    • प्रकाशन : ई-मिथिला
    • संस्करण : 2018

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