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प्रेम, मैं_और_तुम

prem, main_aur_tum

ममता धवन

ममता धवन

प्रेम, मैं_और_तुम

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    तेरे आने और तेरे जाने के बीच

    नरम नवंबर-दिसंबर की दहक छूट गई

    तुझसे मिलने और बिछड़ने के बीच

    शुक्र की शाम सोम की सुबह छूट गई

    तुझसे अनछुए छुए जाने के बीच

    हरसिंगार का सिंगार पतझड़ की पत्तियाँ छूट गईं

    तेरे गीत...संगीत...और तेरी धुन में

    प्रीत के चुम्बन...मौन...मेरी गलबहियाँ छूट गईं

    एक पल का था मिलना...

    और अब तारीख़ होकर छूट गई।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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