Font by Mehr Nastaliq Web

फैज़

phaiz

गुफरान जीलानी

और अधिकगुफरान जीलानी

    लोकतंत्रमे

    जखन-जखन तानाशाही

    विकसित भेलैए

    ओहि सभटा दौरमे

    एकटा फैज़ अहमद 'फैज़' रहलैए

    एखनो लोकतंत्र छैक

    एकटा तानाशाह

    तेँ

    हम 'फैज़' छी

    एहि दौरक

    रे! तानाशाह

    तों दबा देबही

    हमर अबाज

    काटि लेबही

    हमर जुबान

    छीनि लेबही दुनू हाथसँ

    हमर कलम

    तोड़ि देबही ओकरा

    तैयो कोनो गम नहि

    हम चीरि लेब

    अपन हाथक अँगुरी

    लिखैत रहब

    अपन अन्तिम साँस धरि

    तोहर जुल्मक खिलाफ।

    (क्रांतिकारी शायर फैज़ अहमद 'फैज़' केँ हुनक जन्म दिवस 13 फरवरीपर मोन पाड़ैत सादर समर्पित।)

    स्रोत :
    • पुस्तक : लाल ओसक बुन्न [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 80)
    • रचनाकार : गुफरान जीलानी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2018

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY