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किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी

kiye ehan sunnari bhelen draupadi

बुद्धिनाथ झा

बुद्धिनाथ झा

किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी

बुद्धिनाथ झा

और अधिकबुद्धिनाथ झा

    हम गिरहस्थ हम बाप तोहर, गे हम केहन रखवाल।

    किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी, रूपहिं भेलौ जपाल॥

    ओइ बेर जे अयलेँ धरतीपर, युग द्वापर छ्ल

    गे देवराधिता यज्ञाराधिता, बापहु छलहु द्रुपद

    संग लागि जन्महिसँ अयलहु, धृष्टद्युम्न सन भाइ

    दाँत पीसि कऽ तहियहु रहि गेल, कतेक काल कसाइ।

    राजा, राजकुमारहु जँ नहि, कऽ सकलौ प्रतिपाल।

    किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी, रूपहिं भेलौ जपाल॥

    अढरन महादेव की फुरलनि, जानथि अन्तर्यामी

    अनका एकहुटा पर आफद, तोरा पाँच-पाँचटा स्वामी

    तकरा सोझाँ दिना दृष्टि, झोंटा धऽधऽ घिसिऔलकौ

    ततबे नञि, साडी धऽधऽ कऽ नाङट नाच नचौलकौ।

    धोधिबला सब, मोंछबला सब, बड़का-बड़का देखवाल।

    किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी, रूपहिं भेलौ जपाल॥

    हमरा तँ, सुनिते छेँ, गिरहथ आत्महत्या कऽ लैए

    कोना कोना कऽ खटिकऽ मरिकऽ अन्नकेँ उपजाबैए

    ताहि अन्न के ढेउआ कीमति, छूछ गिरहस्थक हाथ

    की लऽ ऋण चुकाओत बैंकक, की लऽ झाँपत माथ।

    कतऽसँ ताकब बेटा-बेटी, स्वयं जान जंजाल।

    किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रौपदी, रूपहिं भेलौ जपाल॥

    अपन जिद्द पर, माइक उकस पर चल गेलें इसकूल

    की बूझल छल कओलेजिया, शिक्षा कोंढ़क शूल

    की बूझल छल सय चन्ना बीच, फेर उघारल जेबेँ

    देशबन्धुसँ राजबाटपर, ठामहि फाड़ल जेबेँ।

    बुझै छलेहेँ अइ कलियुगमे, कृष्णहु गेलहु पाताल

    अपन अस्त्र चाङुरसँ कएलेँ, बेटी हमर कमाल।

    जते बहिनपा आइ बढ़ै छौ, तोंही ओकर मशाल

    बेटी, बेटीक भाग बनत अइ देश भारतक भाल।

    हम गिरहस्थ हम बाप तोहर, गे हम केहन रखवाल

    किए एहन सुन्नरि भेलेँ द्रोपदी, रूपहिं भेलौ जपाल॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : अक्षर निर्क्षर (मैथिली काव्य-संग्रह) (पृष्ठ 33)
    • रचनाकार : बुद्धिनाथ झा
    • प्रकाशन : क्रिएटिव कैम्पस प्रकाशन, हैदराबाद
    • संस्करण : 2015

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