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पानी का चरित्र

pani ka charitr

तैबा हबीब

तैबा हबीब

पानी का चरित्र

तैबा हबीब

और अधिकतैबा हबीब

    चरित्र सिर्फ़ इंसान का नहीं, पानी का भी होता है।

    हर पानी, पानी की तरह नहीं होता

    कुछ देते है जीवन, कुछ विराम

    पानी का चरित्र स्वाद में नहीं

    छुपा है उसके ढंग में

    बादलों से टूटकर मिट्टी की कोख भरने वाला

    ज़ख्मों पर लगने भर से

    पता चल जाता है उसका खारापन

    आँखों के कोरे में बसने वाला

    देखा देता है इंसान के भीतर का मरुस्थल

    बेआकार होकर भी पिघलता रिश्तों की आँच पर

    साथ भर से बदल जाता है उसका चरित्र

    आग के लिए शांति, तो तेल के साथ ज्वाला

    चरित्र का सारा भेद इसी बात पर

    पानी कहाँ से होकर आया

    बहती नदी से निकलकर

    या पलकों की छाँव से

    खारापन कभी भी उसमें पनप सकता है

    चरित्र बेरंग लग सकता है

    और पानी प्रभावहीन।

    स्रोत :
    • रचनाकार : तैबा हबीब
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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