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पदचापें

padchapen

मिथिलेश श्रीवास्तव

और अधिकमिथिलेश श्रीवास्तव

    लिफ़्ट से उतरे हैं लोग

    पदचापें बतला रही हैं

    लिफ्ट लॉबी उनकी प्रतिध्वनियों से

    खदबदा रही है

    लोग जो उतरे हैं चीख़ते हुए बोलते हैं

    इस चीख़ में घर की ओर जाने की पुकार नहीं है

    उस आदमी की तलाश है जो जय श्रीराम बोलने में हिचकता है

    कुछ समय बीत गया वे पदचापें दूसरी ओर मुड़ गईं

    मैंने एक गहरी साँस ली

    और ख़ुद को कोसा आदमी पर शक करना अनुचित है

    लेकिन एक आदमी दिनभर पदचापों के अनवरत आक्रमण झेलता है

    और दिनभर लिफ़्ट से उतरने की आहटें सुनता है

    उसके लिए उचित अनुचित अब कुछ नहीं है

    मैं फ़र्क़ कर सकता हूँ कौन सी पदचाप घर लौटने की है

    कौन-सी पदचाप मेरा पीछा करने के लिए।

    स्रोत :
    • रचनाकार : मिथिलेश श्रीवास्तव
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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