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ओबामा ओबामा ओबामा

obama obama obama

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

ओबामा ओबामा ओबामा

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    ओबामा ओबामा ओबामा

    हंगामा हंगामा हंगामा

    जीतल ओबामा, जीतल अछि बैदन

    हारि गेल पालिन, हारल अछि मेकन।

    गोरकीक उपर करिक्कीक भाव चढ़ल

    व्हाइट हाउसक कुर्सीपर

    ब्लैकमैनक दाव लहल।

    अमेरिका तँ सहजे सुकराती नचैए

    दुनियाक लोक सेहो फगुआ गबैए।

    उजड़त इराक नै

    फनकत इरान नै

    डूबत ने बैंक कोनो, एआइजी कि लेहमैन।

    दुनियामे समताक डंका पिटायत

    लादेनकेँ मानवतासँ इरखा मिटायत

    फूटत ने बम कतहु

    मरत ने लोक कतहु

    सस्तेमे तेल सस्तेमे गैस भेटत

    मड़रक बेटा आब नैनो चलायत

    सुकनीक देहमे एन्जलीना फुलायत।

    चिबायब ने रोटी

    चाभब आब कूकी

    गंगाक बदला पेप्सीएमे नहायब

    गेनमाक बेटीकेँ चानपर पठायब।

    बुधना आब घोंघाक माला ने पहिरत

    गीधना ने कहिओ भैंसी चरायत

    चन्डेभाइ किनि लेता जीन्स टी शर्ट

    भौजीकेँ परसुए खन हालीउड घुमायब।

    थीर रहू, धीर धरू, मोन भरमाउ नै

    पानिमे माछ अछि, कुट्टी लुटाउ नै

    कतेको बेर अब्दुल्ला अछि नाचल

    अनठीया बिआहमे

    हरबड़मे खयाली पुलाव बरकाउ नै

    देखल छथि काटर

    देखले छथि क्लिंटन

    देखि लेलहुँ बुश

    देखलहुँ हुनकर फुस्स।

    ओबामाक दियामे

    तेल कते राखल अछि

    ओकरे ता अटकर लगाबऽ तँ दीअ

    नवे अछि घोड़ा परेखऽ तँ दीअ

    खाइए कते बहैए कते

    दुलकी चलैए कि सरपट भगैए

    सम्हारत इरान कि सुतारत पाकिस्तान

    कोरिया खेहारत कि चीन परतारत

    काबुल बचायत कि पछारत गऽ रूस

    कि लेने-देने पड़ि रहत

    हरो-पालो थुस्स।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 62)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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