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नाराक दोकान

narak dokan

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

नाराक दोकान

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    सुनने छी हम गली-गली शोर—

    दुनियाक मजदूर होइत छैक एक

    तखन कोनाकऽ मारलहक

    हौ कामरेड भाइ

    सारंडाक जंगलमे पुलिसकेँ

    पूछि-पूछिकऽ नाम, धर्म जाति?

    मंडलजी, महतोजी, रामजी, पासवानजी

    झारखंड बिहारमे

    कोनाकऽ भऽ गेलाह अलग-अलग

    एकटा वर्गमित्र एकटा वर्गशत्रु?

    कोन मुँहे बुझयबह हमरा

    द्वन्द्व!

    लेवी वसूलिकऽ बनय लेल अरबपति

    आर कते दिन पसारने रहबह

    नाराक भभटपन!!

    आब नहि बनतह केओ बूड़ि

    बुझि गेलह सब मजूर—

    एके रंग छैक सब दोकान

    केओ एहि नाराक दलाल

    केओ ओहि वादक बेपारी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 84)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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