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नामों के बारे में बातचीत

namon ke bare mein batachit

अनुवाद : रमेश कौशिक

नेद्याल्को योर्दानोव

नेद्याल्को योर्दानोव

नामों के बारे में बातचीत

नेद्याल्को योर्दानोव

और अधिकनेद्याल्को योर्दानोव

    तुम्हारे पैदा होने के दो दिन बाद

    एक पुरानी मोटी किताब में

    लिखा गया तुम्हारा नाम

    जो रहेगा सारे जीवन तुम्हारे साथ।

    तुम्हारा नाम है अस्सेन।

    प्यार करो अपने नाम को—

    यह ऐसा ही क्षणिक है

    जैसे तलवार की चमक

    या बल्गारिया की आज़ादी के लिए

    मरते हुए किसी आदमी का आँसू।

    तुम पूछ सकते हो

    क्यों हर किसी को

    नाम की ज़रूरत है?

    यह दुनिया

    कोई क़ैदख़ाना नहीं है

    जहाँ

    आदमी एक संख्या है।

    आदमियों की दुनिया में

    संख्या नहीं होती

    और नहीं होती है वह नामहीन

    ऐसा होता तो

    निर्मल अधूरे चाँद

    और वैसे ही घुमावदार कटे

    स्याही सोख्ता को देख

    उलझन में पड़ जाते

    लेकिन नाम में है एक अनोखापन

    यह हमेशा तुम्हारे पीछे चलेगा

    जैसे धूप में चलती है

    निश्चय ही तुम्हारी छाया।

    धूप के सामने जाओ।

    नाम है एक बेकार की

    अनिश्चित छाया

    अच्छा हो

    यह तुम्हारे आगे चलने की बजाय

    तुम्हारे पीछे चले

    छोड़ मत देना इसे

    बचाना इसे

    अपने गंदे पैरों से

    और नक़ली धूप से

    मत होना अपने नाम के ग़ुलाम

    और इसे ही बनाना अपना ग़ुलाम।

    तुम्हारे रास्ते पर

    आदमी और नाम

    दोनों हों समान

    प्यार करो अपने नाम को

    यह ऐसे ही क्षणिक है

    जैसे तलवार की चमक

    या बल्गारिया की आज़ादी के लिए

    मरते हुए किसी आदमी का आँसू।

    इसकी रक्षा करो

    और इसे निर्मल रूप में दो

    अपने पोतों-पड़पोतों को

    ठीक ऐसे ही

    जैसे तुम्हारे पूर्वजों ने

    की है इसकी सुरक्षा

    एक युग से दूसरे युग तक

    तुम्हें देने के लिए।

    स्रोत :
    • पुस्तक : बल्गारियाई कविताएँ (पृष्ठ 142)
    • संपादक : रमेश कौशिक
    • रचनाकार : नेद्याल्को योर्दानोव
    • प्रकाशन : पराग प्रकाशन
    • संस्करण : 1985

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