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क्रांति-पूत

kranti poot

आरसी प्रसाद सिंह

आरसी प्रसाद सिंह

क्रांति-पूत

आरसी प्रसाद सिंह

और अधिकआरसी प्रसाद सिंह

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल छै!

    'करू वा मरू'क लगन लागि रहल छै!

    आँखि फूजि गेल,

    नीन टूटि गेल छै!

    रातिमे विभोर,

    चोर लूटि गेल छै!

    के करैत सोर, ठोर दागि रहल छै?

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल छै!

    खून बूढ़ युवा सभक

    खौलि गेल छै!

    माटि गाम नगर-डगर

    गर्म भेल छै!

    पानिमे कि आइ लागि आगि रहल छै!

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल छै!

    देश-कोसमे भरल

    प्रचण्ड रोब छै!

    जिअब कि मरब!

    आइ किछु ने होस छै!

    भूमि छै हिलै, बिहाड़ि आबि रहल छै!

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल छै!

    जन समुद्रमे हिलोर,

    दग्ध प्राण छै!

    पयर छै बढ़ल, महान

    लक्ष्य ध्यान छै!

    भोर भेल छै, अन्हार भागि रहल छै!

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल!

    स्वस्थ राजनीति,

    लोक-तन्त्र नीक हो!

    संविधानमे विधान

    मैथिलीक हो!

    आइ विदेह भूमि माँगि रहल छै!

    मैथिलीक क्रान्ति-पूत जागि रहल छै!

    स्रोत :
    • पुस्तक : सूर्यमुखी (पृष्ठ 39)
    • रचनाकार : आरसी प्रसाद सिंह
    • प्रकाशन : मैथिली अकादमी, पटना
    • संस्करण : 2011

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