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मिथिला विकासक रोडमैप

mithila vikasak roDmaip

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

मिथिला विकासक रोडमैप

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    कहियो-कहियो हम

    ठिठियाबय लागै छी

    निछच्छ बताह जकाँ

    हँसय लागै छी

    सत्ताच्युत राजनेताक खलनायकी हँसी

    ओहिखन हमरा अनुभव होइए

    अपन खलनायकी चरित्रक

    जखन पढ़ै छी जे

    मिथिलाक विकासक बाट थिक

    पान-माछ-मखान

    आ, स्वाभिमान छी एकर पाग

    आहि रौ बा

    फार्मूला तँ सदतियेसँ रहलैए

    तखन किएक अछि

    मिथिलाक दुर्दशा...

    की मिथिलाक सभ किओ

    चाखि लेलकै मखानक खीर?

    आकि फाँकि लेलकै भरिगाल किर्रिये

    आबि गेलै सभक ठोरपर

    पानक लाली?

    पागक स्वाभिमानसँ

    ऊँच भेलै माथ

    हर्षित मोनसँ

    बिहुसै छै ठोर

    जबाबक बदला घुरची-फन्ना

    तँ कुरियाउ अपन रोइयाँ

    टेरू अपन मोंछ

    हमर तँ रोइयाँ-रोइयाँ

    भऽ जाइए ठाढ़

    आ, गड़य लागैए देहमे

    मोन भऽ जाइए बेचैन

    ओहि बेचैनिये हालतिमे

    माथक केश नोचैत

    सोचय लागै छी जे

    मिथिलाक सभटा विकास तँ

    चाटि-पोछिकऽ गीड़ि गेलियै अहाँ

    वैह छी

    अहाँक मुस्की, अहाँक टेढ़ी, अहाँक ऐंठी

    मिथिलाक विकास छी

    अहाँक ब्रासलेट धोती

    पटोरक कुरता

    मिथिला पेण्टिंग बला दोपटा

    नील, टीनोपाल, रिभाइव

    आ, एकर कोर-कलफ

    अहाँक चानीक पनबट्टीमे

    बंद अछि मिथिलाक विकास

    थूकड़ि दै छियै तँ रंगे-रंग

    डोराडोरिक बटुआमे बान्हल अछि

    डोला दै छियै तँ झनझन

    अहाँक धोतीक गेरुलीमे

    खोंसल अछि

    खूँटमे नुड़िआयल अछि

    तेँ जखन-जखन अहाँ

    अलगाबै छियै अपन पोन

    उड़ि जाइए पूब-पच्छिम के बान्ह

    कोशी-कमलामे

    दहाइत रहैए मिथिलाक विकास

    ओहिखन सात बहिन सोखा

    ने किओ देहरि, ने किओ मोखा

    मासक-मास

    चिनिया बदाम खाकऽ

    करैत रहू टाइम पास

    गाबैत रहू मेघ-मल्हार

    कखन हरब दुख मोर हो भोलेनाथ...

    मिथिलाक विकास

    अहाँक नोंसिदानीक नोंसि अछि श्रीमान्

    जखन-जखन मोन होइए

    चुटकीसँ निकालि-निकालि

    सुरकैत रहै छी

    नाकक पूरामे भरिपोख

    तखन मोन रहैए खनहन

    सुआइत,

    एहिठामक विकास तँ अछि अहाँक मुट्ठीमे

    जनताक पेट अछि लात तऽरमे

    गरदनि अछि हाथ तऽरमे

    सभ बातक जड़ि एकटा बात कही

    एहिठामक विकास अछि

    मात्र अहाँक आँखिक पानिमे

    हम तँ, अपन कहलहुँ ने जे

    हमर रोइयाँ-रोइयाँ

    शाहीक काँट जकाँ

    भऽ जाइए ठाढ़

    गड़य लागैए देहमे

    तेँ हे मिथिला विकासक पतक्का फहरेनिहार

    मिथिलाक विकासपुत्र लोकनि

    हमर एहि कुपोषित देहसँ

    देह रगड़बाक अराड़ि लिअ मोल

    आ, देखाउ अपन सामर्थ

    अन्यथा, बदलू अपन

    एहि पुरान-धुरान बीझियायल उक्तिकेँ।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 105)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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