मेरी प्रियतमा का दमकता सौंदर्य
meri priyatma ka damakta saundarya
अगर मैं चाहता
रात के चित्र बना सकता था मैं
विपुल जलराशि के ऊपर सितारों और
सितारों के नीचे फैली हुई जलराशि का नक़्शा
मेरी प्रियतमा का सौंदर्य
अँधेरे में सुबह की किरण लाने वाले पुष्प-सा।
हाँ, अगर मैं चाहता
मैं अभी बंद कर लेता अपनी आँखें
और ले आता इन चीज़ों को दिमाग़ में ज़िंदगी की तरह।
मगर समय बदल गया है।
और जिस ओर भी मुड़ कर देखता हूँ मैं
प्रचंड विद्रोह चला जाता है मेरे साथ
एक चुंबन की तरह—
मलाया
और वियतनाम का विद्रोह—
भारत का विद्रोह
और अफ़्रीका का—
संरक्षक की तरह।
मेरी सरपरस्त बन गई है
आज़ादी की लड़ाई—
और ग़ुलाम
बनाने वालों से मुक्ति के लिए
नृत्य करती हुई पूरी दुनिया की तरह
मेरी प्रियतमा का सौंदर्य दमकता है उसकी हँसती हुई आँखों में।
- पुस्तक : विश्व की श्रेष्ठ कविताएँ (पृष्ठ 88)
- रचनाकार : मार्टिन कार्टर
- प्रकाशन : इंडिया टेलिंग
- संस्करण : 2020
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