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मेरे उसके बीच ईश्वर

mere uske beech ishwar

मिथिलेश श्रीवास्तव

मिथिलेश श्रीवास्तव

मेरे उसके बीच ईश्वर

मिथिलेश श्रीवास्तव

और अधिकमिथिलेश श्रीवास्तव

    मेरे और उसके बीच एक काफ़ी चौड़ी टेबिल का फ़ासला है

    धीमी पीली रोशनी में उसके दमकते चेहरे का ख़ौफ़ है

    उसने मुझे ईश्वर में भरोसा रखने की नसीहत दी है

    इंसान के जीवन में भाग्य की अहमियत को समझाना चाहता है

    उसके दमकते चेहरे की आभा ईश्वर में भरोसे से बनी हुई है

    यह मालूम कर लेना इस धीमी पीली रोशनी में आसान नहीं है

    ईश्वर और भाग्य फिर भी उसके दाएँ-बाएँ बैठे हुए दिख रहे हैं

    मैं फ़रियादी वह ओहदेदार

    मैं बोलनेवाला वह सुननेवाला

    उसका फ़ैसला मेरी पस्त पड़ी हुई जान

    मैं कह देता हूँ

    सर मैं ईश्वर में यक़ीन नहीं करता हूँ

    न्याय पाने के लिए ईश्वर में भरोसा करना पड़ेगा

    दाहिने हाथ के अँगूठे की बगल वाली अँगुली ईश्वर की ओर

    दिखाते हुए उसने कह दिया है

    यह अँगुली का दुरुपयोग है

    मैं कहता हूँ फ़ैसले को इरादतन

    टालने वाले लोग ऐसा करते हैं

    वह हाज़िरजवाब होने लगा है

    फ़ैसला टालने से थोड़ी देर के लिए अन्याय टल जाता है

    इस धीमी पीली रोशनी में मैं साफ़ देख सकता हूँ

    दलीलें सुनते समय उसकी आँखें झुकने लगती हैं

    तथ्यों ब्योरों साक्ष्यों को वह जमी हुई धूल समझता है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : समकालीन सृजन : कविता इस समय (पृष्ठ 288)
    • संपादक : मानिक बच्छावत
    • रचनाकार : मिथिलेश श्रीवास्तव
    • संस्करण : 2006

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