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मेरे साथी की इच्छा है कि मैं उसके लिए शेरिल क्रो पर एक कविता लिखूँ

mere sathi ki ichchha hai ki main uske liye sheril kro par ek kavita likhun

अनुवाद : शायक आलोक

केलिब रे कैंड्रिली

केलिब रे कैंड्रिली

मेरे साथी की इच्छा है कि मैं उसके लिए शेरिल क्रो पर एक कविता लिखूँ

केलिब रे कैंड्रिली

और अधिककेलिब रे कैंड्रिली

    लेकिन मेरी तो बस यही इच्छा है कि अपने साथी के साथ विवाह करूँ

    किसी ऐसे समुद्र तट पर जो ख़ुद को बहुत गंभीरता से नहीं लेता।

     

    हमारी ज़िंदगी का बहुत-सा हिस्सा गंभीरताओं में बीता है।

     

    समय के साथ मैंने जाना है कि प्रेम सबसे अधिक विस्मित तब करता है

    जब यह जान लेने के बाद भी बना रहता है

    कि हम कहाँ से आए हैं।

     

    जब मैं अपने साथी को अपने बचपन के घर ले जाता हूँ

     

    तो वहाँ गोलियाँ होती हैं और सुइयाँ और कूड़े से भरे थैले

    जिन्हें लोग दूरी बनाकर उठाते हैं।

     

    वहाँ मेरे बिछुड़े पिता का नमी से भीगा गत्तों का बिस्तर है

     

    और सिगार के डिब्बे हैं,

    जिनमें पट्टियाँ हैं और धूमिल पड़ चुके चम्मच हैं।

     

    घर को साफ़ करना कठिन है, लेकिन उससे भी कठिन है

    उस घर की स्मृति को साफ़ कर पाना।

     

    जब मैं बच्चा था, मेरे पिता लैवेंडर की मोमबत्तियाँ जलाते

    और अपनी नसों में नशा उतारते।

     

    अब मेरा साथी और मैं एक आग जलाते हैं—ऐसी आग

    जो इस घर में कभी रहे उस परिवार के

    हर निशान को मिटा दे।

     

    काले प्लास्टिक का धुआँ थक्कों की तरह ऊपर उठता है

    और बिखरी हुई गोलियाँ आग में फटने लगती हैं।

     

    मेरा साथी मेरा हाथ थामे रहता है जब बर्च के पेड़ों के बीच

    गोलियों की गूँज फैलती रहती है।

     

    यह लगभग सुंदर लगता है

    लेकिन यह सुंदर नहीं है।

    और सच कहूँ तो

     

    इस धरती पर मेरा साथी और मैं अपना अधिकांश समय

    एक-दूसरे को खट्टे फल खिलाने में

    और आगे बढ़ते रहने की ताक़त बाँटने में बिताते हैं।

     

    हर सुबह मैं आधा चकोतरा और थोड़ी-सी चीनी 

    उसके लिए पैक कर देता हूँ।

    और वह कहता है कि बस इतनी मिठास ही काफ़ी है।

    ***

    स्रोत :
    • रचनाकार : केलिब रे कैंड्रिली
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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