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मेरे हिस्से का तुम घर पर रह लो

mere hisse ka tum ghar par rah lo

ममता धवन

ममता धवन

मेरे हिस्से का तुम घर पर रह लो

ममता धवन

और अधिकममता धवन

    तुम्हारे हिस्से का मैं बाहर घूमना चाहती हूँ

    ये पवन छुए,

    फूल चूमे, तितलियों की गुंजार

    दूर तक पसरी धूप में झरनों की फुहार

    धरती के इंद्रधनुष में

    सपनों को रंगना चाहती हूँ

    मेरे हिस्से की ख़ामोशी तुम ले लो

    तुम्हारे हिस्से का दीवानापन सुबहो शाम चाहती हूँ

    ये फाल्गुन का दिवस

    ये चलती पुरवाई

    इसके पीछे-पीछे उल्लास भरी तरुनाई

    मैं नदी तट तरु छाया में

    प्रेम के गीत गुनगुनाना चाहती हूँ

    मेरे हिस्से की गृहस्थी अब तुम सम्भाल लो

    मैं तुम्हारे हिस्से का खाली वक्त चाहती हूँ

    स्रोत :
    • रचनाकार : ममता धवन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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