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मौत के बाद क्या?

maut ke baad kyaa?

अमित उपमन्यु

अमित उपमन्यु

मौत के बाद क्या?

अमित उपमन्यु

और अधिकअमित उपमन्यु

    ईश्वर एक असामान्य घटना है

    इंसान होना मूलतः सामान्य हो जाना है

    अवतार असाधारण रूप से असामान्य होकर भी

    अंततः इंसान ही रह जाते हैं।

    देवता और राक्षस अमृत के लिए युद्धरत हैं

    अमृत के लिए लड़ने वाले अमर नहीं होते

    ईश्वर नश्वर है

    मर जाना इंसान होना है।

    सब जगह होकर आख़िरकार हम कहीं के नहीं रहते

    मैं ईश्वर से प्रेम करता हूँ

    क्यूंकि वह मेरे जीवन में हस्तक्षेप नहीं करता

    मैं ईश्वर नहीं हो पाया क्यूंकि मैं सब जगह होना चाहता था

    सारी आत्माएँ मौत के पार जाने वाली ट्रेन में खिड़की वाली सीट चाहती हैं

    पर उस ट्रेन में खिडकी-दरवाज़े नहीं होते;

    रोशनी मुर्दों की आँखें खोल देती है।

    जीते जी इंसान कई जगह होने की कोशिश करता है

    मौत के बाद वह सबके सपनों में आता है

    इंसान मर कर ईश्वर हो जाता है।

    मौत का स्टेशन गुजर चुका है

    पूरी ट्रेन में इकलौती जीवंत दिखती चीज़ बची है एक सवाल:

    ‘मौत के बाद क्या?’

    स्रोत :
    • रचनाकार : अमित उपमन्यु
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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