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मैथिलीक पीड़ा

maithilik piDa

रामकृष्ण परार्थी

रामकृष्ण परार्थी

मैथिलीक पीड़ा

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    हमर कतेको मित्र छथि हमरासँ नराज

    हुनका सभकेँ बुझना जाइत छनि जे हम

    मैथिली लिखिक' अप्रत्यक्ष रूपसँ

    बढ़ावा द' रहल छियैक ब्राह्मणवादकेँ

    जखनकि हम हुनका सभकेँ कहैत रहैत छियैक बेर-बेर—

    भाइ, मैथिली हमरो-अहाँक भाषा छी

    एहिपर हमरो-अहाँक अधिकार अछि

    मैथिली मात्र ब्राह्मणेक नहि, मिथिला क्षेत्रमे रहनिहार

    हरेक जाति, हरेक सम्प्रदाय हरेक धर्मक लोकक

    पहिल बकार अछि

    मुदा सभ ब्राह्मणवादक अंध विरोधमे

    नहि मानैत अछि हमर गप्प

    उनटे हमरे समझाबय लगैत अछि गलत

    मैथिली मात्र बाभन टाक भाषा छैक

    अपना सभक भाषाकेँ ठेंठ कहल जाइत छैक

    तखन हम पूछि दैत छियैक

    ठेंठ कथीक, कोन भाषा

    हिन्दीक, भोजपुरीक आकि मैथिलीक

    फेर हुनकर सभक मुँह भ' जाइत छनि बन्न

    मुदा तइयो सभ भितरका मोनसँ

    मैथिलीकेँ नहि करैत छथि पसिन

    फेर हम सोचय लगैत छी एकांतमे

    किएक छैक गैर ब्राह्मण वर्गकेँ

    अपन मायक भाषाक प्रति एहन घृणित विचार

    किएक संकुचित भेल जा रहल छैक दिनो-दिन

    मैथिली भाषाक क्षेत्र-विस्तार

    मिथिलाक ब्राह्मणेत्तर वर्ग किएक करैत अछि

    मैथिलीक बहिष्कार

    तखन हमरा मिलैत अछि मात्र एक जवाब—

    मैथिली भाषाक आन्दोलनकर्ता सभ

    मैथिली भाषाक नामपर बनल संस्था सभ

    मंच-माला-पागक लोभी बुद्धजीवी

    साहित्यकार, पत्रकार लोकनि छथि

    एहि समस्याक लेल जिम्मेवार

    सभ देखैत अछि अपन जाति

    अपन परिवार, अपन समांग

    अपन संस्थामे, समितिमे नहि देबय चाहैत छथिन

    ब्राह्मणेत्तर वर्गकेँ कोनो स्थान

    अपने बनय चाहैत छथि पुरोहित अपने यजमान

    बस देखबैत छथि जे हम छी बहुत बड़का मैथिलीसेवी

    जखन कि यथार्थमे सभ

    मैथिलीकेँ बनौने छथि अपन गुलाम

    बान्हि देने छथिन कसिक' मानकीकरण नामक रस्सीसँ

    भाषा-बोली विवादमे ओझराक

    एकर अस्तित्व तककेँ करय चाहि रहल छथि समाप्त

    मैथिली छटपटा रहल छथि

    अपन स्वतंत्रता लेल

    मैथिली कछमछा रहल छथि

    अपन अस्मिताक रक्षा लेल

    सभ मैथिलीक दुख-दर्द जानिओक'

    बनल छथि अनजान

    मुदा हमरा अपन मायक भाषाक पीड़ाकेँ

    नीकसँ अछि भान

    संगहि ओहि मित्र लोकनिकेँ सेहो

    आकृष्ट कराबय चाहैत छियैक धिआन

    जिनका सभकेँ बुझना जाइत छनि जे

    मैथिली लिखलासँ बढ़ैत छैक ब्राह्मणवाद

    भाइ, अहाँ छी संकीर्ण मानसिकताक शिकार

    हमरा त' मैथिली लिखबा काल होइत रहैत अछि

    एगो स्वतंत्रता सेनानी जकाँ अनुभूति

    बढ़ैत रहैत अछि—

    मातृभाषाक स्वतंत्रता संघर्ष लेल सहास

    जगैत रहैत अछि मातृभाषा मातृभूमिक प्रति अनुराग

    यैह अछि हमरा मैथिली पढ़बाक-लिखबाक सार...।

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 23)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2022

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