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मैंने कहा था तुम्हें बीमार हूँ मैं

mainne kaha tha tumhein bimar hoon main

इलेन काह्न

इलेन काह्न

मैंने कहा था तुम्हें बीमार हूँ मैं

इलेन काह्न

और अधिकइलेन काह्न

    सभी मासूम एक जैसे कपड़े पहनते हैं

    उनके मुँह खुलते हैं

    उनके मुँह बंद होते हैं

    वे लाल पड़ते हैं और उनका ख़ून बहता है

    और वे चकित होते हैं कि वे हैं कहाँ

    प्रस्थान से हिचकते

    और उसके लिए ख़ुद को तैयार पाते

    पर जब उनके पास आता वह

    पेनिसिलीन की तरह

    चले जाते ख़ुशी से

    क्या तुम नोच रहे हो ख़ुद को?

    मैं क्या चाहती हूँ

    और कैसे चाहती हूँ

    यह वे मुझे बताते हैं

    वे सही थे

    खाल कपड़ों की तरह है एकदम

    सारी हिंसा

    किसी बचाव में की जाती है

    अब मैं यह करती हूँ

    अपनी पीठ के बल लेटकर उम्मीद

    उम्मीद करती हूँ सब अच्छी, अच्छी चीज़ों की

    क्यों नहीं

    कपड़ा फ़ैल जाए रंग के बादल की तरह

    एक झीने चौकोर कपड़े में हो कराहट

    मैं नहीं जानती

    और इसलिए लिखती हूँ इसके बारे में

    मैं जीवन की क़द्र करती हूँ

    और उनकी जो कभी कुछ नहीं कहते

    हम ईश्वर की देखरेख में हैं

    जो इस क़ाबिल नहीं है

    कुछ लोग हैं जो बचाएँगे हमें

    अच्छा होने की संभावना से।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : इलेन काह्न

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