मैं तुम्हें धोखा दे रहा हूँ
main tumhein dhokha de raha hoon
तुमसे दूर जाने के बाद
तुम्हारा साथ महसूस करने के लिए
मैंने पढ़ीं तुम्हारी भेजी कविताएँ
सुने तुम्हारे वक्तव्य
चुरा ली तुम्हारी पहनी हुई शर्ट
तुम्हें महकने दिया अपने भीतर, अपनी स्मृति में
दुहराईं तुम्हारी पंक्तियाँ
याद किया तुम्हारे हाथ का बना दाल-भात
और उसमें ऊपर से छिड़का अतिरिक्त नमक
जो बिना शिकायत खाती रही क्योंकि उसका स्वाद था तुम्हारी देह का स्वाद
याद करने के क्रम में अचानक याद आता है
तुम्हारा अकुलाहट के एक लम्हे में कहना
‘मैं आपको धोखा दे रहा हूँ’
मेरा जवाब—’मुझे पता है’
मैं मुस्कुराती हूँ
मुझे पता है, तुम्हारी आँखें बता देती हैं
तुममें साहस नहीं है मुझे बता पाने का
मैं तुम्हारी स्मृति का दशांश भी नहीं बचती
तुमसे दूर जाने के बाद
- रचनाकार : शिवांगी गोयल
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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