मैं तुम्हारी राजकुमारी नहीं
main tumhari rajakumari nahin
जो एक-दूसरे को चीरती रहती हैं
मैं कोई ज़रिया नहीं हूँ
जिसके सहारे तुम आध्यात्मिक ज्ञान तक पहुँच जाओ
या कम-से-कम मनकों का काम ही सीख लो
मैं तो बस तुम्हें यह बता सकती हूँ कि फ़्राई ब्रेड कैसे बनाते हैं—
एक कप आटा लो, एक चुटकी नमक, एक चम्मच बेकिंग पाउडर
इसमें दूध या पानी या बीयर मिलाओ और इन्हें हिलाओ
जब तक यह गुँथ न जाए
अब हर टुकड़े को थपथपाकर गोल बनाओ
और उसे कुछ देर छोड़ दो
अब इसे गरम तेल में तलो जब तक वह सुनहरा न हो जाए
यह एक भारतीय व्यंजन है—
लेकिन तभी, यदि तुम्हें मालूम हो कि इंडियन एक सरकारी शब्द है
जिसका हमारे अपने नामों से कोई लेना-देना नहीं
मैं तुम्हारे लिए कोई मंत्रोच्चार नहीं करूँगी
कोई आध्यात्मिकता नहीं दिखाऊँगी
तुम्हारे साथ पसीना नहीं बहाऊँगी
न ही कछुओं की सुंदर कथाओं से
तुम्हारा अपराधबोध कम करूँगी
मैं कविता पढ़ने के लिए नृत्य-वेश धारण नहीं करूँगी
और न ही बहुत कुछ समझाने बैठूँगी
मुझे नहीं लगता कि हमें समझने की तुम्हारी कोशिशें
कामयाब होने वाली हैं, इसलिए मैं तो यही चाहूँगी
कि तुम हमें उसी ज़रा-सी शांति में ही रहने दो
जिसे हम अब भी तुम्हारी लगातार हरकतों के बावजूद
किसी तरह बटोर लेते हैं
अगर तुमने मुझे ख़ुद को ठीक करने के बारे में
$300 की विशेष फ़ेमिनिस्ट काउंसलिंग वाला कोई और घटिया पर्चा भेजा
तो शायद मैं किसी चीज़ में आग लगा दूँगी
अगर तुमने एक बार और कहा
कि मैं बहुत बुद्धिमान हूँ
तो मैं तुम्हारे ऊपर उल्टी कर दूँगी
देखो मुझे
मेरा भ्रम देखो, मेरा अकेलापन, डर
हमारी उन तमाम जद्दोजहदों की चिंता
जिनसे हम अपने लिए बची हुई
थोड़ी-सी चीज़ों को बचाए रखने की कोशिश करती हैं
मेरे दिल को देखो, अपनी कल्पनाओं को नहीं
मुझे फिर कभी अपनी उस चेरोकी परनानी की कहानी मत सुनाना
मत मान लेना कि मैं दुनिया के हर दूसरे मूलनिवासी कार्यकर्ता को
व्यक्तिगत रूप से जानती हूँ
कि मुझे सभी क़बीलों के नाम मालूम हैं
या मैं उन नामों का उच्चारण कर सकती हूँ
जिन्हें मैंने कभी सुना तक नहीं
या मैं पेयोटी सिलाई की विशेषज्ञ हूँ
अगर तुमने एक बार फिर
कभी मुझसे कहा
कि मैं कितनी मज़बूत हूँ
तो मैं ज़मीन पर लेट जाऊँगी
और सिसकना शुरू कर दूँगी
ताकि आख़िरकार तुम
मेरी मानवीय कमज़ोरी भी देख सको
अपनी ही तरह।
मैं मज़बूत नहीं हूँ, मैं तो घिस चुकी हूँ
मुझे जीवन का वरदान मिला है
जबकि जिन बहुतों को मैं जानती थी
वे मर चुके हैं
मुझे अभी कितने काम करने हैं, बर्तन धोने हैं,
घर साफ़ करना है
कोई जादू नहीं है
मेरे इन साधारण, फटे हुए हाथों को देखो
जिन्होंने वही चीज़ें धोई हैं
जो तुम धोते हो
देखो मेरी आँखें, डर से भरी हुई,
एक घर में जहाँ मैं अकेली हूँ, देर रात...
देखो, मुझ पर तरस खाना या मुझे चाहना
दोनों एक ही बात हैं।
एक कप आटा, एक चुटकी नमक, एक चम्मच बेकिंग पाउडर
और इतना भर द्रव कि सब गुँथ जाए
याद रखना यह सिर्फ़ मेरी व्यंजन विधि है
और भी बहुत-सी विधियाँ हैं
कम-से-कम
मुझे यहीं आराम कर लेने दो।
- रचनाकार : क्रिस्टोस
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित
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