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माँ

maan

हमर छोट सनक आँगन

हिलसैत अछि पोर-पोर

जखन अपन फाटल एँड़ीसँ

आँगनमे जीवनक अरिपन लिखैत अछि माँ

छठिक घाटपर

पीयर नुआ पहिरने पानिमे ठाढ़ि भेल

हरियर कचोर सेमारमे

फुलायल कनैलक गाछ लगैत अछि माँ

माँकें फोटो खींचैत

लैंस नहि हृदयमे उतरल अछि एक टा चित्र

सम्बन्धक गहबरमे सिनेहक जरैत दीप अछि माँ

जितियाक असोआसमे अरजने अछि अरुदा

आवाजक ले-ऊँचसँ

गमि लैत अछि सभटा कुशल-कलेस

अपन बियौहती गहना बेचि क'

हमरा दोहरा जीवन देने अछि माँ

कर-कुटमैतीक अछैत

पाया-पार बसल बेटाक चिन्तामे

औनाइत रहैत अछि माँ

कहियो काल ओकर व्यक्तिगत चिंता

बनि जाइत अछि अंतरराष्ट्रीय

जखन बेटी-रोटीक सम्बन्धक अछैत

कोनो सीमांत गाममे

बटगबनीक भास बदलि जाइत अछि बंदूकमे

कुरूससँ स्वीटर बुनैत माँकें

कहियो लेब' नहि पड़लै हमर नाप

आँगनसँ बुनैत रहल हमर कायाक अकास

जाँतपर झीक दैत माँ

आब गीतक हाक नहि

हमर कवितामे ताकय लगैत अछि लय

चारि-पट्टीक आँगनमे

अपनाकें एसगर बहटारैत

एखनहिसँ पोताक मुड़नक करैत अछि ओरियान

बेटीक सेवापर जीवन खेपैत माँ

पोते लेल कियैक करैत अछि कबुला-पाती

पुछलापर सुधबौक भ' जाइत अछि माँ

गाम टपत त' कातिकमे जायत सिमरिया स्नान

खोंछि भरत तखने पहिरत नवका नुआ

घरक ओरियानमे अपनाकें सबदिना झोंकने

एतबी मनोरथ रखैत अछि अपन हिस्सामे माँ

जँ एहि जीवन कालमे

एक टा अंतिम शब्द कहबाक होअय

ओहि दीर्घ मौनसँ पहिने

हम एकबेर खूब जोरसँ कहब—माँ

स्रोत :
  • पुस्तक : नेपथ्यसँ अबैत हाक (पृष्ठ 45)
  • रचनाकार : विकास वत्सनाभ
  • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
  • संस्करण : 2025

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