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समलैंगिकता

samlaingikta

अनुवाद : शायक आलोक

फ़्रैंक ओ’हारा

फ़्रैंक ओ’हारा

समलैंगिकता

फ़्रैंक ओ’हारा

और अधिकफ़्रैंक ओ’हारा

    तो हम अपने मुखौटे उतार रहे हैं, क्या यही बात है,

    और अपने मुँह बंद रख रहे हैं?

    मानो किसी एक निगाह ने हमें आर-पार बेध दिया हो!

     

    किसी बूढ़ी गाय का रंभाना

    उस निर्णय से अधिक कठोर नहीं

    जितने वे वाष्प

    जो बीमार पड़ने पर

    आत्मा से बाहर निकलते हैं।

     

    इसलिए मैं परछाइयों को

    अपने चारों ओर धुएँ के एक गुबार की तरह लपेट लेता हूँ,

     

    और अपनी आँखें इस तरह सिकोड़ता हूँ

    मानो किसी बहुत लंबे ओपेरा के

    सबसे अनुपम क्षण में बैठा हूँ।

     

    फिर हम चल पड़ते हैं—

     

    बिना किसी शिकायत के,

    और इस आशा के बिना भी

     

    कि हमारे नाज़ुक पाँव

    फिर कभी धरती को छुएँगे,

     

    बहुत जल्द तो बिल्कुल नहीं।

     

    मैं अपनी ही आवाज़ के विधान की

    पड़ताल करूँगा।

     

    मैं बर्फ़ की तरह शुरू करता हूँ—

     

    उँगली कान पर,

    कान हृदय पर—

     

    उस अभिमानी आवारा कुत्ते की तरह

    जो बारिश में

    कूड़ेदान के पास खड़ा है।

     

    अपने को

    पूर्ण निष्कपटता के साथ निहारना

    कितना अद्भुत है—

     

    यहाँ तक कि

    हर शौचालय की

    खूबियों का हिसाब लगाते हुए भी।

     

    फ़ोर्टीन्थ स्ट्रीट

    नशे में है,

    और हर बात पर यक़ीन कर लेती है।

     

    फ़िफ़्टी-थर्ड स्ट्रीट

    काँपने की कोशिश करती है,

    लेकिन बहुत अधिक निश्चिंत है।

     

    भले लोग

    एक पार्क से प्रेम करते हैं।

     

    अनाड़ी लोग

    रेलवे स्टेशन से।

     

    और फिर वे हैं—

    दैवी लोग—

     

    जो धूल में पड़ी

    एक अबीसीनियाई सिर की

    लंबी होती छाया पर

     

    अपने गर्म हवा जैसे

    लंबे, सुरुचिपूर्ण क़दम

    घसीटते हुए

     

    आते-जाते रहते हैं,

    और बहादुरों को उलझा देने के लिए पुकारते हैं—

    गर्मी का दिन है,

    और इस दुनिया में

    सबसे ज़्यादा

    मैं चाहता हूँ

    कि कोई मुझे चाहे।

    ***

    स्रोत :
    • रचनाकार : फ्रैंक ओ'हारा
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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