यह औरत समलैंगिक है, सावधान!
फ़ौजी अस्पताल में जहाँ मैं नर्स सहायक के रूप में काम करती थी
गलियारों की दीवारों के पास क़तार में चीख़ती हुई औरतें
पड़ी रहती थीं
प्रसव की प्रतीक्षा में
या अपने शरीर का कोई अंग हटवाने के लिए।
बड़े निजी कमरों में से एक में जनरल की पत्नी भर्ती थी
जिसकी नाक से एक मस्सा हटाया जाना था।
हमें निर्देश दिया गया था कि उसकी विशेष देखभाल करें—
उस मस्से की वजह से नहीं, न ही उसकी नाक की वजह से
उसके पति की वजह से, जो एक जनरल था।
उतनी ही औरतें मरती हैं जितने मर्द मरते हैं और यह एक तथ्य है।
वहाँ एक मिलनसार मरीज़ थी, जो पहले से ही किसी और की
हो चुकी, एक युवा औरत जो एक्स-रे से बुरी तरह जल चुकी थी
उसके शरीर में छिद्रों—मलाशय, मूत्राशय, योनि की जगह लंबी सफ़ेद ट्यूबें थीं;
मैं उसके बाल संवारती थी, यह
मेरा काम था, लेकिन वह मेरा ऐसे ध्यान रखती थी जैसे
किसी के छूने से वह ख़राब न हो जाए।
ओह मौत, ओह मौत
क्या तुमने उस मृत औरत की आँखों की चमक देखी है?
जब आप नर्स सहायक होती हैं
तो कोई अचानक आप पर ध्यान देता है
और मरीज़ के बिस्तर के बारे में चिल्लाता है
और चादरें उघाड़ देता है ताकि आप
उन्हें बार-बार ठीक कर सकें
जबकि मरीज़ इंतज़ार करती है
दर्द से दोहरी होकर
कि आप बिस्तर फिर से ठीक करें
और कोई भी आपकी तरफ़ नहीं देखता
सिर्फ़ उस चीज़ पर ध्यान देता है जो आप नहीं करतीं
यहाँ, जनरल, इस सैनिक का बेड-पैन पकड़ो
एक पल के लिए, एक साल के लिए पकड़ो—
फिर हम तुम्हें उसका बिस्तर ठीक करने के काम पर प्रमोट करेंगे।
हमारा मानना है कि तुम ऐसी गंदगी नहीं फैलाओगे
अगर तुम्हें ही उसे साफ़ करना पड़े।
यह एक कल्पना है।
यह महिला लेस्बियन है, सावधान!
जब मुझे गिरफ़्तार किया गया और सेना से
बाहर निकाला जा रहा था तो आदेश जारी हुआ : कोई भी
इस औरत से बात न करे और उन तीन
दीर्घ माहों तक, लगभग किसी ने बात नहीं की : डे-रूम में मेरा प्रवेश होते
ही सन्नाटा छा जाता; वे
डरी हुई थीं, वे जानती थीं कि हवा उन्हें
मुँडेर से उड़ा ले जाएगी, पुलिस आ जाएगी,
पानी उनके फेफड़ों में भर जाएगा।
मैंने जिस चीज़ को भी छुआ
वह ख़राब हो गई। वे मेरी प्रेमिकाएँ थीं, वे
औरतें, लेकिन किसी ने भी हमें तैरना नहीं सिखाया था।
मैं डूब गई, मैंने तीन-चार को साथ डुबो दिया
जब मैंने ‘उस काम का’ इक़बालिया बयान साइन किया जो हमने
साथ किया था।
अब मुझसे कोई कभी बात नहीं करेगी।
मैंने यह कहीं पढ़ा था; मैं वहाँ नहीं थी :
दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिकी सेना ने कुछ तैरने वाले
एम्फीबियन टैंक बनाए थे और उन्हें उतारने के लिए
यूरोप के तट पर ले गई थी
लैंडिंग जहाज़ों का एक बेड़ा तैयार था
और सब देख रहे थे। हर टैंक में
6 लोगों का दल था और कुल 25 टैंक थे। पहला टैंक रैंप से नीचे उतरा
और डूब गया; दूसरा, तीसरा,
चौथा, पाँचवाँ, छठा भी नीचे उतरे
और डूब गए। उन्हें डूबना नहीं था,
इंजीनियरों से ग़लती हो गई थी। दल के सदस्य
घबराहट में रुकने के आदेश का इंतज़ार कर रहे थे
लेकिन कोई आदेश नहीं आया
और हज़ारों लोगों के सामने, हर टैंक के 6 सदस्यों ने
अपने अफ़सरों को सैल्यूट किया
बारी-बारी से अपने टैंक का हैच बंद किया
और उसे समुद्र में उतार दिया
और डूब गए; ऐसा तब तक चलता रहा
जब तक सभी 25 टैंक डूब नहीं गए।
क्या उनकी आँखें ख़ाली-ख़ाली थीं
क्या वे हँसते हुए मरे?
वे आपस में क्या बातें कर रहे थे
जब पानी अंदर आ रहा था?
क्या जनरल उनका प्रेमी था?
- रचनाकार : जूडी ग्रान
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित
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