चूँकि अब हम युवा नहीं रहे, अब हफ़्तों को चुकाना पड़ता है
एक-दूसरे से दूरी में बिताए गए वर्षों का हिसाब।
यद्यपि समय की यही अजीब-सी वक्रता
मुझे याद भी दिलाती है कि हम अब युवा नहीं रहे।
क्या मैं कभी बीस की उम्र में सुबह की सड़कों पर इस तरह चली थी
कि मेरे बदन में ख़ालिस ख़ुशी की लहर बहने लगे?
क्या मैंने कभी किसी खिड़की से शहर के ऊपर झुककर
भविष्य की आहट सुनी थी
जिस तरह यहाँ प्रतीक्षा में तुम्हारे फ़ोन की घंटी को
विकलता से सुनती हूँ?
और तुम—तुम भी उसी रफ़्तार में मेरी ओर बढ़ती हो।
तुम्हारी आँखें सदाबहार हैं, उनमें वैसी ही हरी चमक है
जैसी गर्मियों की शुरुआत में खिलने वाली ब्लू-आइड घास में होती है
या जलधारा से धुली हुई हरी-नीली जंगली क्रेस में।
बीस की उम्र में, हाँ : हम सोचते थे कि हम हमेशा ही जीते रहेंगे।
पैंतालीस की उम्र में मैं हमारी सीमाओं तक को जान लेना चाहती हूँ।
मैं तुम्हें छूती हूँ यह जानते हुए कि हमारा जन्म भविष्य में नहीं हुआ था
और किसी तरह हममें से हर एक दूसरे को जीने में सहायता देगा
और किसी जगह हममें से हर एक को दूसरे की मृत्यु में मदद करनी होगी।
***
- रचनाकार : ऐड्रियन रिच
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित
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