Font by Mehr Nastaliq Web

द्वार

dvaar

अनुवाद : शायक आलोक

मैरी हाउ

मैरी हाउ

द्वार

मैरी हाउ

और अधिकमैरी हाउ

    मुझे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि वह द्वार जिससे होकर

    मैं आख़िरकार इस दुनिया में दाख़िल होऊँगी,

    वह जगह होगी जो मेरे भाई के जिस्म ने बनाई थी।

    वह मुझसे कुछ अधिक लंबा था : एक नौजवान,

    मगर परिपक्व,

    अट्ठाईस बरस की उम्र में ही अपना जीवन जी चुका

    हर चादर तह कर चुका 

    जिसे उसे कभी तह करना था, हर गिलास धो चुका 

    जिसे उसे कभी भी ठंडे बहते पानी के नीचे धोना था।

     

    यही है वह चीज़ जिसका तुम इंतज़ार कर रही हो,

    वह मुझसे कहा करता था।

    और मैं पूछती कि क्या? और वह कहता,

    यह—अपना चीज़ और मस्टर्ड सैंडविच ऊपर उठाते हुए।

    और मैं फिर पूछती कि क्या?

     

    और वह कहता, यह—

    जैसे चारों ओर अपनी नज़रें घुमाता हुआ।

    ***

    स्रोत :
    • रचनाकार : मैरी हाउ
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY