डी. ओ. ए.
Di. o. e.
“तुम जानते थे कि मैं कौन हूँ
जब मैं उस दरवाज़े से भीतर आया।
तुमने समझा था कि मैं मर चुका हूँ।
ख़ैर, मैं मर ही चुका हूँ। एक आदमी
चल-फिर सकता है, बात कर सकता है, यहाँ तक कि
साँस भी ले सकता है और फिर भी
मरा हुआ हो सकता है।”
मेरी पसंदीदा फ़िल्म नॉयर D.O.A. में
एडमंड ओ’ब्रायन पसीने से तर-बतर हैं
और ज़बरदस्त एक्टिंग कर रहे हैं।
मैं इसे देखे बिना रह नहीं सकता बंद नहीं कर सकता,
ख़ुद को इससे जुड़ा हुआ महसूस किए बिना रह नहीं सकता।
कल रात जब मैं कोलंबस से एंडिकॉट तक
टॉर का नया उपन्यास लेने गया
तो मुझे लगा हर प्यूर्टो रिकन किशोर, हर नशेड़ी,
हर शहरी समृद्ध युगल मेरी छड़ी और मेकअप पर नज़र गड़ाए हुए है।
“तुम मर चुके हो,” वे मानो समवेत स्वर में कह रहे थे।
किसी अँधेरे बार में बरसों पहले
मैंने यह “रौशन ज़हर” पा लिया था।
मैं जब अपना पेय पीता था तो मेरी आँखें चमकती थीं।
उसके बाद न कोई इलाज था, न पीछे मुड़ सकने का कोई रास्ता।
मुझे पता लगाना था कि आख़िर वह क्या चीज़ है जो
अंदर ही अंदर मुझे कुतर रही है।
कठिनाई इसके जिस्मानी असर नहीं हैं :
नशे में धुत आदमी की तरह लड़खड़ाते हुए
(एडमंड ओ'ब्रायन हॉलीवुड के
सबसे मशहूर शराबियों में से एक थे)
चालीस के दशक के सेटों पर भटकते हुए
बारी-बारी पसीने में भीगना और बुख़ार में तपना
चेहरे और सिर पर सरीसृपों जैसे धब्बे उभर आना।
सबसे कठिन है विदा कहना—
उस दृश्य की तरह जहाँ बैकग्राउंड में वायलिन
तेज़ गूँज उठते हैं जब ओ'ब्रायन
अपनी प्रेमिका सह गर्ल फ्राइडे पॉला (जिसका किरदार
पामेला ब्रिटन ने निभाया) को
आख़िरी बार बाँहों में भर लेता है। वे सिनेमा के इतिहास के
सबसे असंभावित प्रेमी-युगल हैं—वह ठिगना,
लटके गालों वाला शराबी और वह साधारण-सी,
बुनियादी तौर पर प्रतिभाहीन अभिनेत्री
जो पंद्रह साल बाद
अपनी सबसे बड़ी शोहरत पाएगी ‘माय फेवरिट मार्शियन’ में
एक दवाओं की आदी मकान-मालकिन की भूमिका में।
मेरे पास पंद्रह साल का समय नहीं हैं और एडमंड ओ'ब्रायन के पास भी नहीं।
उसके पास बस इतना वक़्त है कि पॉला से कह सके
कि वह उससे कितना प्रेम करता है, फिर एक खुली कार में बैठकर
अपने क़ातिल से अंतिम मुक़ाबले को निकल पड़े।
मैं भी ऐसा एक मुक़ाबला चाहता अगर यह समझ पाता
कि आख़िर कौन था वह पिस्तौलधारी, बालों में चमकदार तेल लगाए
बेहद निर्मम ख़लनायक, जिसने मेरी ज़िंदगी छीन ली।
वासना? लत? ग़लत वक़्त पर ग़लत जगह होना?
लेकिन कहानी बस इतनी ही नहीं है।
जो मैंने महसूस किया, उसकी सच्चाई के प्रति
पूर्ण निष्ठा, हर क्षण के लिए खुला रहना
और हर बार, एक तरह का प्रेम :
इन सबने मिलकर मुझे यहाँ पहुँचाया है
इस डगमगाते आत्मचेतन हाल तक—निमोनिया,
कुपोषित शरीर, भयानक कैंसर,
कोई भविष्य नहीं, सोने का दिल,
एक शानदार बी-फ़िल्म के प्रति दीवानगी
गर्मियों की एक दीप्त दोपहर
जिसमें मैं साल के
सबसे पके हुए टमाटर ख़रीदने निकलता हूँ
और उस दावत के लिए प्रोशुट्टो भी
जो मैं आज रात उस आदमी के लिए पकाऊँगा
जिससे मैं प्रेम करता हूँ
दोस्तों के फ़ोन और पार्क तक एक पैदल सैर
घूरती निगाहों को नज़रअंदाज़ करते हुए
अपना दिमाग़ ख़ाली करने के लिए।
एक दिन, हर दिन जैसा, फिर भी अलग।
मरे हुओं के लिए ऐसा दिन इतना बुरा भी नहीं।
***
- रचनाकार : टिम ड्लुगोस
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित
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