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क्यतनी बढ़िया भगंता की भउजी!

kyatni baDhiya bhaganta ki bhauji!

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

क्यतनी बढ़िया भगंता की भउजी!

बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

और अधिकबलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'

    छिनु-छिनु राँह देखि का काटिस,

    कब भाइनि की भउँरी ह्वयि-हयिं,

    रूनुकि-झुनुकि डोली ते उतरी,

    क्यतनी सुंदरि भगंता की भउजी!

    चुंदरी से मुलक्यायि झाँपि मुँहु,

    लरिका-बिटिया चुटकी काटयिं;

    भुँइँ मा गड़ी जायि खिसियउनी,

    अतनी खलिस भगंता की भउजी!

    करयिं म्यहरिया मुँहुँ द्यखरउना

    वह घूँघुट मा आँखी मूँदे!

    काँपि-काँपि काढ़यि पयिंलगवा—

    क्यतनी डरभुत भगंता की भउजी!

    उये सुर्ज अथये तकु भिंजरयि ,

    ननद द्यावरन का मनु राखयि;

    कर्री बात जहरु असि घूँटयि,

    अतनी सालिस भगंता की भउजी!

    बाह्यर-भीतर प्वाढ़ परा मनु,

    तब वह असिलि रूप दरसायिसि,

    धीरे-धीरे ग्वाड़ गडायिसि—

    अतनी गहबड़ि भगंता की भउजी!

    जो जस किहिस तयिस फलु तिहिका,

    झुँकि-झुँकि दूलहू तक 'वाँ-बोले',

    पूरे बाँटन बाँटि दिहिस जब—

    अतनी भारी भगंता की भउजी!

    पुरवा, गाँउँ, जिला तकु जानिसि,

    भाइनि के घर दुलहिन रानी—

    रोटी-कपरा क्यार मुकदिमा।

    अक्किल वाली भगंता की भउजी!

    बड़े बहादुर जी घर वाले,

    मूँड़े बाहयिं धरि-धरि धाहयिं;

    नाग-नाथ तस साँप-नाथ मुलु,

    पूरयि किहिनिसि भगंता की भउजी!

    स्रोत :
    • पुस्तक : पढ़ीस ग्रंथावली (पृष्ठ 144)
    • संपादक : डॉ. रामविलास शर्मा, युक्तिभद्र दीक्षित
    • रचनाकार : बलभद्रप्रसाद दीक्षित 'पढ़ीस'
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ
    • संस्करण : 1998

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