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कुडज़ू

kuDzu

अनुवाद : शायक आलोक

सईद जोन्स

सईद जोन्स

कुडज़ू

सईद जोन्स

और अधिकसईद जोन्स

    मुझे क्षमा नहीं किया जाएगा

    जो कुछ मैंने अपने आप से बना लिया है

    उसके लिए।

     

    मिट्टी सिमट जाती है

    मेरे काँटे जैसे चुंबनों से

    चीड़ के पेड़ मुझसे मुँह फेर लेते हैं

    वे जानते हैं कि मैं क्या कर सकता हूँ।

     

    अपनी लिपटती टाँगों से

    हर ग्रीष्म

    जब हवा भर जाती है 

    कामना से मैं अपनी सारी जिह्वाएँ

    तुम पर रख देता हूँ।

     

    इस देह को शांत करने के लिए

    तुम्हें उत्तर देना होगा

    मेरी लताओं-सी लालसा को।

     

    मैंने हमेशा 

    बस यही चाहा है

    कि दरारों को चूमूँ

    उन्हें खोल दूँ

    और ओस से भीगी गुहाओं के भीतर

    फलूँ-फूलूँ।

     

    तुम कितना ग़लत समझते हो

    मेरे स्नेह को

    और यदि मैंने कभी

    गौरैयों का गला घोंटा भी हो तो केवल इसलिए 

    कि मैं बेहतर गीतों का स्वप्न देखता था।

    स्रोत :
    • रचनाकार : सईद जोन्स
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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