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क्षमा करब हे महाकवि

kshama karab he mahakavi

श्याम दरिहरे

श्याम दरिहरे

क्षमा करब हे महाकवि

श्याम दरिहरे

और अधिकश्याम दरिहरे

    माड़ भातक आशमे थेथरल

    मुहथरिपर ठाढ़ि

    छितनी सन केशमे दैत

    खुरपा सन नहक कोड़नि

    हमर कविताक साक्षात् नायिका

    बुधनी।

    चोकरल आममे

    संठीसन नेनाकेँ देखैत छी

    लगबैत चोभा

    ने कोनो लावण्य

    ने कोनो शोभा

    तँ लिखिऔ कोना

    गरूअ नितम्ब

    उपर कुच भार

    कोनाकऽ लिखिऔ

    नयन ने तिरपित भेल।

    लाउ कतऽसँ

    एहन कल्पना दृष्टि

    क्षमा करब हे महाकवि

    नहि हैत किन्नहु हमरा बुते

    एहन कविताक सृष्टि।

    ओना नायिका सेहो छै अर्द्धवस्त्रा

    अहींक नायिका सदृश्य

    ओकरो आँचर तर

    पयोधर उघार छै

    कतसँ अनतै अंगिया

    रोंआ-रोंआ डूबल कर्ज उधार छै।

    पीन पयोधर छलनि आँचर तर

    अहाँक सजनीक

    होइत बैरसँ सिरिफल

    मुदा बुधनीक तँ शैशव

    सहजहिं हेरायल छै

    यौवन?

    यौवन तँ सजितहिं

    उसरल बजार छै।

    कोनाकऽ

    ओकर गुदड़ी अकाशमे

    शृंगारक चेफरी हम लगाउ

    शीत-घाममे झमारल-पछारल

    मुरझायल लत्तीमे कोनाकऽ

    मेरू सन नमहर फल हम फराउ

    खधियामे धसल डोका सन आँखिकेँ

    कोनाकऽ सारंग नाम धराउ।

    चारिमपनमे अहाँक

    निराश भेल परिणाम

    तीनपन बिति गेल

    कुचयुग-चिकुर-नितम्बक संधिमे

    एमहर नायिका तँ सबदिन

    चारिएपन कटैए

    दिन खाए फेर रातुक झखैए

    सौंसे जिनगी छै तातल सैकत

    भरल सदिखन ओकर

    नयन वारि विन्दु छै

    दुखक लागल पहाड़

    जिनगी अथाह सिन्धु छै।

    मुनिहुक मनसिज

    मनमथ जगौलहुँ अहाँ

    देखाकऽ तीतल-वसन-तन

    मुदा

    एकर वसन छै सदिखन भीजल

    बिछैए दिनभरि

    घोंघा खुरचन

    कोनाकऽ जगतइ ककरो मन्मथ

    देखि ओकर धधकैत

    लहकैत मन।

    एकदिन ओकरे संतापसँ

    समूचा पोखरि

    लागि जेतै आगि

    ओकरे धाहसँ कोमलांगी अहाँक

    जयतीह कतहु भागि।

    राजा शिवसिंह रूप नारायणकेँ

    सेहो जरायत

    अहूँक सौन्दर्यबोध

    क्षणेमे बिलायत

    तखन कोना करू हम

    अहाँक कविताक गान

    क्षमा करब हे महाकवि

    हमरा नहि फुरैए आन

    कोनो ज्ञान।

    अहाँक समय भिन्न छल

    हम समयक पाटमे फँसल छी

    अभावक नागसँ देह भरि डसल छी

    सौंसे देहपर पेट चतरल अछि

    गीत-कवित सबटा बिसरल अछि

    भूख हमर काव्य अछि

    भूखे महाकाव्य

    अन्नेटा हमर ब्रह्म अछि

    वैह सबठाम पसरल अछि

    क्षमा करब हे महाकवि।

    स्रोत :
    • पुस्तक : क्षमा करब हे महाकवि [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 104)
    • रचनाकार : श्याम दरिहरे
    • प्रकाशन : नवारंभ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2016

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