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कोशीक आगमन

koshik agaman

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

कोशीक आगमन

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    कहैत छथिन

    जोतखी-पण्डित

    पोथी-पतरा उचारिकेँ

    एहिबेर भगवती एतीह मनुक्खपर

    तखन हम कहलिअनि

    कोशीक बिपटल

    मशान बनल एहि भूमिपर

    हेरायल-भुथिआयल

    लच्छक-लच्छ

    अनचिन्हार लहासक

    हिसाब-किताब देबाक लेल

    आब

    नहि औतीह मनुक्ख दिस

    किएक तँ हुनके बहिन कोशी

    हुनका संग छल केने

    संहारिणीक रूप धेने

    गामक-गाम सुड्डाह करैत

    लच्छक-लच्छ लहास हेलबैत

    सवा मास पहिनहि

    कुसहासँ सवार भेल

    चल एलीह मनुक्खपर

    आब

    ओहि हाड़क-हार

    सजेबामे लागल रहतीह

    शोणितक नीसाँमे

    मातल बिसरल रहतीह

    आगाँमे कऽल जोड़ने ठाढ़ भेल

    त्रस्त अरदसुआ सभकेँ

    अगिला आवाहन धरि

    एम्हर बगुला भगत सभ

    जान बकसि देबाक लेल

    गोहारिक आश्वासन दैत

    सहयोगक अक्षत छीटि रहल अछि

    आ, धीरज धरबैत अछि जे

    आब अहाँ सभक फूलहासि जरूर हेतै

    बस, अपन-अपन डालीमे

    पान-परसाद सजौने

    एहिना पाँच बर्ख धरि

    कऽल जोड़ने, चुपचाप ठाढ़ तँ रहू।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 22)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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