खींचकर तमाचा मारिए सब
kheench kar tamacha mariye sab
खींचकर तमाचा मारिए सब
बेटी बचाओ,
बेटी पढ़ाओ अभियान पर
क्योंकि हैं नहीं हम लोग
बेटियों की सुरक्षा करने लायक।
बेटियों को जीवन दे पाने के लायक।
ऐसा कीजिए
अब एक नया अभियान चलाइए
बेटी को बचाना है तो
कन्या भ्रूण गिराना है
सही है न?
बलात्कार से तो अच्छा है
गर्भ में ही मार देना
यही औकात है
अब इस महान पुरातन संस्कृति की।
और इसमें रहने वाले लोगों की।
न कर सको कुछ तो
अपनी हवस पूरी करना बंदकर दीजिए
पति-पत्नी के रूप में
मानवीयता के घटते दौर में,
वंश बढ़ाने के बहाने।
मत जनिए
न कोई लड़का
न कोई लड़की
लड़का होगा तो
पता नहीं कब बलात्कारी बन जाये
लड़की हुई तो
क्या पता कब उसके शरीर को नोंच दिया जाए।
नहीं...
बस, बस, बस
अब बंद कर दीजिए
नवसृजन का ढोंग रचना।
एक बार अंत हो जाने दें
कलुषित होती इस महान सभ्यता का
इस महान संस्कृति का।
सब कुछ ख़त्म हो जाने दें इस संपूर्ण पृथ्वी से
बस भटकती रहें
बलात्कारी दरिंदों की विचलित आत्माएं
बदबू सूँघती हुई
ख़ुद के शरीरों की।
जिन्हें मर कर भी सुकून न मिले कहीं।
जब सदियाँ बीत जाएँ
मनुष्य को ख़त्म हुए इस पृथ्वी पर से
तब
फिर कोई
मनु और श्रद्धा
सृजन करें मानवीयता सहित मानव का।
- रचनाकार : अनामिका अनुगूँज
- प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित
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