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कवयित्री की ओर से बाघिन के लिए

kavyitri ki or se baghin ke liye

अनुवाद : शायक आलोक

मे स्वेन्सन

मे स्वेन्सन

कवयित्री की ओर से बाघिन के लिए

मे स्वेन्सन

और अधिकमे स्वेन्सन

    बाल

    तुम नीचे गईं 

    तुम्हारी नज़र सिंक में पड़े एक बाल पर पड़ी

    और तुमने मेरी टूथपेस्ट के ट्यूब की गर्दन दबा दी।

    तुम गरजीं। मेरी पसलियाँ अब तक दुख रही हैं।

    आज सुबह तो मेरी पेंसिल पर भी तुम्हारे दाँतों के निशान हैं।

    अपनी बड़ी बिल्ली आँखें मुझ पर गाड़े हुए तुम्हें दीखता है एक नरम शिकार।

    तुम्हारे पेट के मुलायम ग़लीचे में दुबकी हुई

    तुम्हारी साँसें इतनी उत्तप्त

    मुझे तुम्हारे लोम की गमक आती है।

    आओ, मेरे ऊपर साँस लो, ओ जंगली बिल्ली,

    अपने मुलायम पंजे यहाँ रखो।

     

    नमक

    तुम किसी भी चीज़ में नमक नहीं डालतीं

    तो मैं बिना नमक के ही खा रही हूँ।

    अंडों पर शहद ठीक ही है

    और टोस्ट पर सरसों की चटनी।

    मैं कोई शिकायत नहीं कर रही, बस कह रही हूँ कि

    मैं तुम्हारे साथ रह रही हूँ।

    तुम्हें अपना मांस कच्चा ही पसंद है

    परवाह नहीं अगर यह बासी है।

    ज़रूर तुम्हारे पेट में होंगी स्वाद ग्रंथियाँ

    जो तुम इतनी जल्दी खाना निगलती हो।

    शाम जल्दी उतर आती है। कोहरा छाया है। अभी-अभी

    मुझे चीज़ के टुकड़े पर तुम्हारे दाँतों का एक और निशान मिला।

    मुझे भूख लगी है। 

    छलाँगे लगाती घर आ जाओ।

    मैं तुम्हें शराब की बोतल दूँगी कि तुम उसे 

    अपने दाँतों से खोलो।

    तुम मेरे लिए एक स्टेक सेंक देना, नमकहीन।

    मेरी कॉफ़ी दो बार उबालना

    नीले टीवी पर बजते किसी जिंगल के साथ

    प्रार्थना-शब्द भी पढ़ देना।

    हमारे ठंडे सोफ़े पर घुटनों पर डली चादर के नीचे

    मेरे कानों के पीछे देखना कि कहीं कोई खरोंच तो नहीं 

    और मुझे बाँहों में भर लेना।

     

    रेत

    तुम सही हो कि मैं रेत के एक-दो कण

    शायद अपने मोज़ों के साथ 

    बिस्तर तक ले आई थी।

    लेकिन उन्हें तुमने ही तो झाड़ गिराया 

    बाक़ी सब चीज़ों के साथ।

    नींद में तुम करवटें बदलती हो 

    लुढ़कती हो 

    हर चीज़ को

    अपने नीचे और मुझसे 

    दूर करती हुई। मैं हमेशा चादर के अपने हिस्से के लिए

    हाथ मारती रहती हूँ।

    या फिर तुम हर घंटे मुझे जगाती रहती हो

    ‘आई-लव-यू’ की उनींदी आवाज़ में

    मेरा चेहरा दबाते हुए उन नरम  

    कंधों के बीच। मेरे सारे तैरते सपने चकरघिन्नी 

    हो जाते हैं और कभी पूरे नहीं होते। मैं अब पहले से 

    अधिक दुबली हूँ। मेरी घड़ी अब भी तेज़ चलती रहती है।

    लेकिन सबसे अच्छा तब लगता है जब हम साथ सवारी करते हैं

    मेरे कूल्हे तुम्हारी गोद में सिमटे। तुम मुझे स्टीयरिंग सँभालने देती हो।

    तुम्हारे हाथ मेरी पसलियों के चारों ओर लिपटे हुए 

    और तुम्हारे गीले, नींद में ढीले पड़े दाँत मेरी गर्दन पर कसे हुए।

    बिस्तर में रेत का एक कण या फ़र्श पर पड़ा एक बाल

    तुम्हें खिन्न कर देता है।

    लेकिन अगर मैं आने दूँ तुम्हें तो 

    नहाकर गीले बदन ही सरसराती चली आओगी।

    या अपनी ऊनी टोपी और स्की-जैकेट में

    अगर मौसम ठंडा हो।

    बाघिन, मुझे डाँटो मत

    मुझे बाहर खड़े होकर बाल सँवारने को मत कहो।

    मुझे सावधानी से पंजा मारो।

    चाटो, पर काटो मत। उसे बने रहने दो जो तुम्हारा है।

     

    स्वप्न

    तुम दाँतों में ‘द नेकेड एप’ किताब दबाए

    बाथटब में उतर जाती हो।

    अपने सुनहरे तीन कोने वाले रोयों को भिगोते हुए

    पीठ टिकाकर लेट जाती हो और 

    चौड़ा खुला सीना पानी पर तैरता रहता है।

    तुम उठती भाप में किताब पढ़ रही हो

    और मैं तुम्हारे ‘टाइगर कप’ से कॉफ़ी पी रही हूँ।

    तुम कहती हो कि तुमने सपना देखा

    कि मेरे पास तुम्हारी शिशु-पुस्तिका थी

    और यह थी गुलाबी और नीली।

    मैंने एक पन्ने की ओर इशारा किया

    और वहाँ तुम्हारा चेहरा था

    एक शावक-सी मुस्कान में।

     

    तुम अपने पंजे अपने बग़लों में दबाती हो

    और बाघ स्वर में रंभाती हो।

    फिर पुकारती हो : इधर आओ कवयित्री

    और मुझसे यह बाल

    हटाओ। मैं आती हूँ।

    यह मेरा ही एक बाल है।

    मैं सावधानी से उसे मार डालती हूँ

    और बाहर ले जाती हूँ। उस पर पैर पटकती हूँ

    और उसे दफ़न कर देती हूँ।

     

    बेगोनिया के पौधों की क्यारी में।

    फिर मैं अपने जूते उतार देती हूँ

    ताकि रेत का कोई कण

    हमारे बिस्तर तक न आ सके।

    अब तुम्हारी जगह खाना मैं बनाऊँगी

    और इसमें चुपके से कुछ नामक डाल दूँगी 

    जब तुम इधर नहीं देख रही होगी।

    ***

    स्रोत :
    • रचनाकार : मे स्वेन्सन
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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