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कविता

kavita

धूमकेतु

धूमकेतु

कविता

धूमकेतु

और अधिकधूमकेतु

    कविता थिक निश्शंक सार्थक शिलालेख

    कालक आतंकक

    कविता मनुक्खक सत्य शाश्वत

    कविता सहज ईमान थिक

    काल विघटन बीच काव्य अक्षर आस्था

    कविता मनुक्खक मनुख हेबाक प्रमाण थिक।

    कविता उपस्थित बात थिकै दहकैत

    बात—एकदम सोझ सपाट धधरा

    युग-युगक संचित-दमित

    मनुषत्वक अवमाननाक

    कार्बनित महुरायल ज्वाला।

    कविताक जीहक धार हनहन

    कुलिश सन दाँत

    ढाहि कऽ पाखंडक चट्टान

    करत मुखरित

    जन-जनक प्राणक भितरिया

    शांतिक आकांक्षाक निनाद

    अपन परिभाषा, अपन सदर्भ संधानक

    नव जनगणक उद्दाम जिज्ञासा

    करत मुखरित

    मुक्तिकामी महत्तम आरोहणक अनुगूंज।

    कविते खोलत भेद जे चक्करदार सुरंगक

    कोन-कोनमे दोग-सान्हिमे

    देशी मुर्गी चाभि विदेशी अबूझ कोडमे

    सोधि रहल अछि कंप्यूटरपर उजरा हाथिक झुंड

    आतंकक आदिम अपसंस्कृति।

    जे जनैत छथि बात

    देवालपर लिखलाहाकेँ

    बाँचि सकै छथि, गूनि सकै छथि

    तिनका कथिक बध लागल छनि?

    वाक हरण भऽ कोन बैंकक कोन सेफमे बंद पड़ल छनि?

    च-वा-ही तू भेद मात्र कविता जनैत अछि।

    जिनका जानक छनि बात

    तिनका छनि कोनो होश नै

    देश-कोसक माटि-पानिकेँ

    जे शोनितमे बारि अपन अँतरीक टेमी

    कुल्लम साजल महल अटारी, राजकक्षकेँ

    आलोकित कयने छथि।

    जनिक रिक्ततामे बेहोशीक

    किसिम-किसिमक गैसक धूआँ

    चुप्पेचाप भरल जाइत छनि, दिना-राती

    तिनके विवश-निसट्ठ आँखिक

    मार्मिक, मूक, मुदा औनाइत

    तप्पत आखड़ उमड़ि

    सहज कविता बनैत अछि।

    सूर्योदयसँ पूर्व / तमसकेँ आर गाढ़ करबाक

    दुरभिसंधिमे व्यस्त

    लोक क्षितिजपर संभावित

    सभ अरुणाभासँ तप्त।

    रंग-विरंगक ध्वजा पताका गोलबंद भऽ

    घटाटोप बारुदक पाखंडक धूआँ साजि

    बुझै अछि

    सूर्य आब फेरो की उगता!

    स्वयंसिद्ध अधिकार मनुक्खक

    हरा जाइत छै जखने

    विस्तृत आकाश मनुक्खक

    लागि जाइत छै बन्हकी

    पाखंडक अन्हरजालमे

    ओझरा जाइ छै सत्य मनुक्ख

    तेहने कोनों विकट लग्नमे

    फोड़ि कतौ धरतीक छाती अकस्मात्

    अपरिपथगामी जनक आँखिमे

    लहकि-लपटि कविता जरैत अछि।

    सभसँ ऊपर सत्य मनुक्खक

    तै सँ ऊपर किछु नै

    ताही सत्यक जयोद्घोषमे

    काव्य सतत अर्पित अछि सहजहि।

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिलीक नव कविता (पृष्ठ 10)
    • संपादक : राजमोहन झा
    • रचनाकार : धूमकेतु
    • प्रकाशन : आरम्भ
    • संस्करण : 1996

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