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काल्हि किछु आर हेतैक

kalhi kichhu aar hetaik

गुफरान जीलानी

गुफरान जीलानी

काल्हि किछु आर हेतैक

गुफरान जीलानी

और अधिकगुफरान जीलानी

    चौरासी भेलै

    हम चुप छलहुँ

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    अयोध्या भेलै

    गोधरा भेलै

    हमर संवेदना हिलबो नहि कएल

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    हिटलर जर्मनीमे की-की नहि कयलक

    के नहि जनैत अछि

    मुदा हम किछु नहि कयलहुँ

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    आतंकवाद पनपलै

    आईएसआई जन्म लेलकै

    कोहराम मचेलकै

    हाहाकार मचेलकै

    हम एकदम शांत छलहुँ

    किएक तँ हम भारतीय नहि छलहुँ

    अमेरिकी नहि छलहुँ

    ने ब्रिटिश छलहुँ

    हम कियो नहि छलहुँ

    जे आतंकवाद आईएसआईकेँ झेलि रहल

    फिलिस्तीनमे बहुत किछु भेलै

    मुदा हम कनबो नहि कयलहुँ

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    ईराक-अफगानिस्तानमे की-की भेलै

    मुदा हमरा कोनो फरक नहि पड़ल

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    म्यांमारमे की नहि भेलै

    मुदा हम अपसोचो नहि कयलहुँ

    किएक तँ हम नहि छलहुँ

    जकरा संग भऽ रहल छल

    आइ सीरिया भऽ रहल छैक

    हम चैनसँ सुतल छी

    किएक तँ हम नहि छी

    जकरा संग भऽ रहल छैक

    काल्हि किछु आर हेतैक

    बल्कि हिन्दुस्तान हेतैक

    हेबेटा करतैक

    मुदा

    एखन तुरत

    हमर घर आयल अछि

    दोहरा रहल अछि

    ओहि सभटा घटनाकेँ

    हमर नजरिक सोझाँमे

    जूजी काटि रहल छैक

    हमर छोट बेटाक

    हमर मायकेँ बीचसँ

    चीरि रहल छैक

    छाती काटि रहल छैक

    हमर बहिनक

    हमर बेटीक बोटी-बोटी

    नोचि रहल छैक

    बलात्कार कऽ रहल छैक

    हमर कनियाँक

    हम जोर-जोरसँ

    चीख रहल छी

    चिल्ला रहल छी

    मुदा कियो नहि आबि रहल अछि

    किएक तँ सभ

    नहि छथि

    जकरा संग भऽ रहल छैक!

    स्रोत :
    • पुस्तक : लाल ओसक बुन्न [मैथिली कविता-संग्रह] (पृष्ठ 48)
    • रचनाकार : गुफरान जीलानी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना
    • संस्करण : 2018

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