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जीवित रहने के लिए एक प्रार्थना-पाठ

jivit rahne ke liye ek pararthna paath

अनुवाद : शायक आलोक

ऑड्रे लॉर्ड

ऑड्रे लॉर्ड

जीवित रहने के लिए एक प्रार्थना-पाठ

ऑड्रे लॉर्ड

और अधिकऑड्रे लॉर्ड

    हममें से उन सबके लिए जो किनारे पर रहते हैं,

    किसी फ़ैसले के स्थायी किनारों पर खड़े

    निर्णायक और अकेले

    हममें से उन सबके लिए

    जो चुनाव के क्षणिक स्वप्नों का सुख नहीं उठा सकते

    जो दहलीज़ों में प्रेम करते हैं—

    आते-जाते, दो भोरों के बीच के घंटों में

    एक साथ

    भीतर भी देखते हुए और बाहर भी

    पहले भी और बाद में भी

    ऐसे वर्तमान की तलाश में

    जो भविष्य को जन्म दे सके

    वैसे, जैसे बच्चों के मुँह में रोटी

    ताकि उनके सपनों में

    हमारे सपनों की मृत्यु का प्रतिबिंब न हो

     

    हममें से उन सबके लिए

    जिनके माथे के बीचोंबीच

    भय की एक धुँधली रेखा अंकित कर दी गई

    जो माँ के दूध के साथ

    डरना सीखते रहे

    क्योंकि इसी हथियार से

    सुरक्षा के किसी भ्रम के सहारे

    भारी क़दमों से चलते लोगों ने

    हमें चुप कर देना चाहा।

     

    हम सबके लिए

    यह क्षण

    और यह विजय—

    हमारा बच जाना कभी नियति में लिखा ही नहीं गया था।

     

    और जब सूरज उगता है, हमें डर लगता है

    कि शायद वह ठहरेगा नहीं

    जब सूरज डूबता है, हमें डर लगता है

    कि शायद वह सुबह फिर न उगे

    जब पेट भरा होता है, हमें डर लगता है बदहज़मी का

    जब पेट खाली होता है, हमें डर लगता है

    कि शायद फिर कभी खाने को ही न मिले

    जब हम प्रेम में होते हैं, हमें डर लगता है

    कि प्रेम कहीं खो न जाए

    जब हम अकेले होते हैं, हमें डर लगता है

    कि प्रेम कभी लौटकर नहीं आएगा

    और जब हम बोलते हैं, हमें डर लगता है

    कि हमारे शब्द सुने नहीं जाएँगे

    न ही उनका स्वागत किया जाएगा

    लेकिन जब हम चुप रहते हैं, तब भी

    हमें डर लगता है

     

    तो बेहतर है कि हम बोलें

    और यह याद रखें कि 

    हमारा बच जाना कभी नियति में लिखा ही नहीं गया था।

    स्रोत :
    • रचनाकार : ऑड्रे लॉर्ड
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित

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