Font by Mehr Nastaliq Web

जित्ते पक्षी की यह पंक्ति

jitte pakshi ki ye pankti

तेजी ग्रोवर

तेजी ग्रोवर

जित्ते पक्षी की यह पंक्ति

तेजी ग्रोवर

और अधिकतेजी ग्रोवर

    आज यहाँ नाव नहीं आएगी

    जिसके पाल में धूप बनती है

    जिस धूप में धुले जलपक्षी

    ठीक लहरों की तरह उड़ते हैं

    लहरें—जिनकी उजली पाँत

    बहुत पहले

    आम परिंदों से कहीं पहले

    आँख से ओट होती है

    उस आँख से ओट

    जो तट पर

    सुबह के साथ खुलती है—

    यह मछुआरे की बच्ची की आँख है

    बच्ची

    जो दुबली उँगलियों पर

    जलपक्षी पाँत गिनती है

    फिर कहती है

    इत्ती ही मछली दो ईश्वर

    जित्ते पक्षी की यह पंक्ति उड़ती है

    यह देख, यह देख

    गिन इसे, गिन इसे ईश्वर

    गिन देख इसे, यह पंक्ति उड़ती है

    इत्ती ही मछली दो ईश्वर

    जित्ते पक्षी की यह पंक्ति उड़ती है

    यह उस ईश्वर से कहती है

    जो सफ़ेद पाल की नाव है

    जिसमें धूप बनती है

    जिस धूप में धुले जलपक्षी

    ठीक लहरों की तरह उड़ते हैं

    उसी नाव से कहती है

    जो आज यहाँ नहीं आएगी

    और पंक्ति टूट जाएगी

    फिर भी कहती है

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY