फूटल घैलक खपटा जकाँ
हम अपन अतीतकेँ
इतिहासक गलीमे फेकि आयल छी,
हमर वर्त्तमान
डस्टबीनमे फेकल अयनाक छोट-छोट
टुकड़ी जकाँ
चमकि उठैत अछि,
जाहिमे देखबामे अबैत अछि
पाँच वर्षक लेल कटल हमर हाथ
सटकल हमर पेट
नग्न हमर देह
प्यासें तबधल हमर खेत
उदास तकैत चिमनी
बिनु माथक भीड़
अप्स्याँत चौराहा,
सबटा डस्टबीनमे चमकि रहल अछि
(आ भविष्य?)
भविष्य तँ ग्लेशियर जकाँ अदृश्य अछि
ठोसो अछि, तरलो अछि, बहैत आबि रहल अछि।
फूटल घैलक खपटा जकाँ
हम अपन अतीतकेँ इतिहासक गलीमे
फेकि आयल छी।
- पुस्तक : अवान्तर (पृष्ठ 48)
- रचनाकार : मायानन्द मिश्र
- प्रकाशन : मैथिली चेतना परिषद्, सहरसा
- संस्करण : 1977
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