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ईब सुनो ई

iib suno ii

सोनू यशराज

सोनू यशराज

ईब सुनो ई

सोनू यशराज

और अधिकसोनू यशराज

    बतियाती स्त्री के चित्र उपहास के पात्र बने

    अच्छी स्त्रियाँ कम बोलती हैं, सुनना उनकी नियति है

    हमेशा कान में बजते रहे, यही सामाजिक गान

    कहने सुनने की वाचिक परंपरा में कहा—सुनी हो

    इसलिए उन्होंने सुना ज़्यादा, कहा कम

    पति का नाम लेने वाली स्त्री ने

    अक्सर सुनो, सुनो कह कर पुकारा

    पर सुनना उनकी ही नियति रही

    पुरुष उन्हें कम शब्दों में बड़ी बातें समझाते रहे

    संवाद असीमित थे पर टॉपिक सीमित

    देश दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर

    संवाद करती एंकर को चाव से देखा-सुना जाता रहा

    अपनी आकांक्षाएँ बताती स्त्री हमेशा

    एक लंबी चुप्पी से घूरी गयी

    या उन्हें सुना गया कुछ देर

    पर रिमोट अपने हाथ में रहा

    उनके कानों को सजाने के उपक्रम

    सदा कारगर रहे

    झुमके हामी भरते रहे सुनने की

    आज झुमके अपनी जगह हैं

    पर कान में झूमते हैं ईयर फ़ोन

    वह सुन रही है

    पर वह सुन नहीं रही हैं!

    स्रोत :
    • रचनाकार : सोनू यशराज
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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