हिक़ारत भरा समय

अनिल कुमार सिंह

हिक़ारत भरा समय

अनिल कुमार सिंह

और अधिकअनिल कुमार सिंह

    हिक़ारत भरा समय है यह

    स्थितियाँ चूँकि गड्डमड्ड हैं इसलिए

    निरीहता कब हथियार बन जाएगी

    ठीक-ठीक समझा नहीं जा सकता

    अपनी दयनीयता को ढाल की तरह

    आगे करते हैं हम किसी का भी

    अपमान करने के बाद

    शब्दों के ही नहीं हमारे भावों के भी

    अर्थ बदल गए हैं

    इसीलिए यह संभव हो सका है कि

    जब हम एक बेहतर दुनिया की बात

    कर रहे हों तो हो सकता है कि ठीक

    उसी समय यह भी सोच रहे हों कि

    दुनिया हमारे क़दमों के नीचे कैसे आए

    या संवेदनशीलता घड़ियाली आँसू

    बहाने के मुहावरे से आगे जाकर हमें

    हत्या के लिए उकसाए

    या किसी की हत्या के बाद हमें अपने पर

    हिक़ारत आए

    हो सकता है यह आत्मघृणा किसी

    आत्मसंघर्ष का प्रतिफल हो बल्कि

    हमें हत्या करने के बेहतर गुर सिखाए

    हिक़ारत भरा समय है यह

    और स्थितियाँ सचमुच गड्डमड्ड हैं

    यहाँ तक कि कवि जब अपनी कविता में

    चीख़ते हैं कि उन्हें जीवन से

    प्यार है तो इसका मतलब भी वही नहीं होता

    हो सकता है वे अपनी घृणा को

    छुपाने के लिए ऐसा कह रहे हों

    ऐसा कैसे हो सकता है कि जीवन से

    प्यार किए बिना

    जीवन को सचमुच प्यार किया जाए।

    स्रोत :
    • पुस्तक : पहला उपदेश (पृष्ठ 68)
    • रचनाकार : अनिल कुमार सिंह
    • प्रकाशन : राधाकृष्ण प्रकाशन
    • संस्करण : 2001

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