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ग्लोबल गामक गीत

global gamak geet

विकास वत्सनाभ

विकास वत्सनाभ

ग्लोबल गामक गीत

विकास वत्सनाभ

और अधिकविकास वत्सनाभ

    किला दरभंगासँ लाल किलाक प्राचीर धरि

    आकि कमलाक कछेरसँ कांगो नदीक कनगी धरि

    देशान्तरक सकुचैत परिधिमे

    'समुच्चा ग्लोब सहटि क' भेल अछि एक टा गाम'

    एक टा एहन गाम जकर समदामे

    नहि ठओर पबैत अछि पौनी-पसारी

    जकर बिड़रोमे उड़िआय लगैत अछि मुरेठा पाग

    जकर स्वर दाबि दैत अछि साँझ परातीक राग

    एहि गामक लोक

    अपन कान्हपर कनहेठने अछि ग्लोब

    आँजुरमे हँसोथने अछि सातो समुद्रक पानि

    धरतीसँ अकास धरि रखने अछि अबरजात

    अपन डीह उजाड़ि क'

    चिनबारपर उपजबैत अछि कुश

    एहि गाममे अधलाह अछि निजताक संग ठाढ़ होयब

    अतिचार अछि निज पहिचानक गुमान करब

    तें एकर मल्टीप्लेक्सक पछुऐतमे

    हाकरोस करैत अछि देसिल बयनाक अनुराग

    एहि गामक अट्टालिकाक न्योंमे

    समाधिस्थ अछि कतेको एकचारी

    जकर लेखा-जोखा

    नहि भेटैत अछि कोनो सरकारी आर्काइवमे

    एकर छातीपर काबिज अछि मुट्ठी भरि लोक

    जे पनामा किंवा स्विसमे

    उधेसि रहल अछि खेत-खरिहानक सेंसेक्स

    गाम अपन उद्योगक आँचमे

    सुड्डाह केलक सिक्की-मौनी

    नहुँ-नहुँ घोंटि गेल कत्ता घरक कमौनी

    विकासक लाउडस्पीकर फूँकि

    पचा गेल पसीखानासँ अबैत विपत्तिक गीत

    एहि गामक बाटपर

    एकहि संग विकासक बटगबनी गबैत अछि

    मिस्र मेसोपोटामिया

    एकर हाटपर वालस्ट्रीटक पीड़ासँ

    ठोहि पाड़ि कनैत अछि दलाल स्ट्रीट

    मधुबनीक फोड़नसँ

    झोराओल जाइत अछि मेलबॉर्नक माछ

    एहि गामक वातानुकूलित छाहरिमे

    एखन मौला रहल अछि

    कुजरनीक ढाकीमे राखल पटुआ परोड़

    गाम अपन इलबाइसक फेरीमे

    उजाड़ि रहल अछि चार चार परहक तिलकोर

    एतुक्का लोक आब नहि ढेरियबैत अछि गोबर-करसी

    मोरंगबाली नहि बनबैत अछि सुकरातीक दियौरी

    सभकें बुझल छैक जे रूस पठेतै यूरिया

    कुरियर करतै चीन लच्छाक-लच्छा भुकभुकिया

    एहि अभिनव गामक अनघोल

    आइ ने काल्हि

    एकमुड़िया बनाओत सभकें

    परसू हड़पि लेत ओहि वस्तु-विधिकें

    जाहिसँ परिभाषित होइत अछि हमर-अहाँक परिचिति

    एहि गाममे जड़िसँ काटल जयबाक होइत अछि ओरियान

    लोककें सुखितगर बनेबाक

    फूसिये घौना करैत अछि एतुका आलाकमान

    गाम जे एक टा उपभोगक तंत्र अछि

    बिसरल अछि जनकल्याणक साबिक मंत्र

    'सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे संतु निरामयाः'

    स्रोत :
    • पुस्तक : नेपथ्यसँ अबैत हाक (पृष्ठ 74)
    • रचनाकार : विकास वत्सनाभ
    • प्रकाशन : किसुन संकल्प लोक, सुपौल
    • संस्करण : 2025

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