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फ़ोर्टिनब्रास का शोकगान

fortinabras ka shokgan

अनुवाद : सुरेश सलिल

ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

फ़ोर्टिनब्रास का शोकगान

ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

और अधिकज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त

     

    अब चूँकि हम अकेले हैं, कुँवर, एक-पर-एक बातें कर सकते हैं 

    तुम सीढ़ियों पर लेटे हो यद्यपि, और एक मरी हुई चींटी से अधिक 

    नहीं देख सकते, टूटे पंखों वाले काले सूर्य के सिवा कुछ भी नहीं, 

    मैं कभी कल्पना नहीं कर पाया मुस्कानविहीन तुम्हारी बाँहों की 

    और अब, जबकि टूट गिरे घोंसलों की तरह वे पत्थर पर पड़ी हैं 

    पहले की ही भाँति बेसहारा हैं।

    ठीक यही है अंत—

    बाँहें अलग पड़ी हुई—तलवार अलग पड़ी हुई— सिर अलग 

    और नायक*1 के पैर मख़मली जूतियों में।

     

    सैन्यवेश में न होने के बावजूद तुम्हारी अंत्येष्टि एक सैनिक की

    जैसी होगी

    यही तो एक कर्मकांड है जिसकी थोड़ी-बहुत जानकारी मुझे है 

    न मोमबत्तियाँ न रुदनगान, सिर्फ़ तोपों के पलीते और धमाके 

    गलियारे में घिसटती क्रेप, लोहटोप, बूट, तोपख़ाने में जुते घोड़े 

    और ढोल।

    ढोलों से बढ़कर और क्या होगा भला! 

    यह सब मुझे करना होगा हुकूमत हाथ में लेने से पहले 

    शहर को गर्दन से दबोचकर एक हल्का झटका देना पड़ता है उसे 

     

    जो भी हो, तुम्हें वक़्त से पहले नष्ट होना ही था हैमलेट, 

    तुम जीने के लिए नहीं थे

    तुम्हारा यक़ीन इंसानी मिट्टी में नहीं, मणिभ कल्पनाओं में था 

    हमेशा नींद में ऐंठते हुए-से हवा में क़िले बनाते रहे

    महज़ कै करने के लिए नृशंसतापूर्वक हवा को चबाते रहे 

    किसी भी इंसानी चीज़ से तुम्हारा सरोकार नहीं रहा, 

    यहाँ तक कि फेफड़ों को सिकोड़ना-फुलाना भी तुम्हें नहीं आया

     

    अब तुम्हें शांति मिल गई, हैमलेट, अपना पावना तुमने पा लिया 

    और अपूर्व शांति में लीन हो। शेष जो है वह ख़ामोशी नहीं है 

    बल्कि उसका संबंध मुझसे है, तुमने आसान हिस्सा चुना—

    एक शिष्ट हस्तक्षेप

    किंतु अनादि अनंत ख़बरदारी से एक वीरोचित मृत्यु की भला

    क्या तुलना—

    हाथ में एक ठंडा सेब, बैठने को एक सँकरी कुर्सी 

    और दृष्टि चींटियों की बाँबी व दीवार घड़ी के डायल पर जमी हुई

     

    अच्छा कुँवर, अलविदा, मुझे कुछ काम निबटाने हैं 

    एक सीवर परियोजना है और वेश्याओं व भिखमंगों पर

    एक डिगरी

    और हाँ; जेलों की एक बेहतर व्यवस्था भी विकसित की जानी है 

    क्योंकि तुमने ठीक ही कहा कि समूचा डेनमार्क एक क़ैदख़ाना है...

    तो अब मैं अपने कामों पर रुख़्सत होता हूँ 

    इस रात हैमलेट नाम का एक सितारा जन्मा था 

    अब हम कभी नहीं मिलेंगे

    मैं जो छोड़ जाऊँगा वह दुखांतकी के अनुरूप नहीं होगा

    एक-दूसरे को मुबारकबाद देना या अलविदा कहना हमारे लिए कहाँ

    हम द्वीपसमूहों पर रहते हैं

    और वे ही इन शब्दों को सींचते हैं, उनके बस में क्या है, 

    कुँवर, है ही क्या आख़िरकार उनके बस में!

    स्रोत :
    • पुस्तक : रोशनी की खिड़कियाँ (पृष्ठ 331)
    • रचनाकार : ज़्बीग्न्येव हेर्बेर्त
    • प्रकाशन : मेधा बुक्स
    • संस्करण : 2003

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