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एना बनै छै कविता

ena banai chhai kavita

रघुनाथ मुखिया

रघुनाथ मुखिया

एना बनै छै कविता

रघुनाथ मुखिया

और अधिकरघुनाथ मुखिया

    जखन भंडार कोणमे

    छिटकैए बिजलौका

    ढनढनाबैए करिया मेघ

    अहुँछिया काटय लागै छै

    कारी-कारी बादरि

    झमाझम झहरैए बरखा

    सिहकै छै बसात

    सिहरि जाइए रोइयाँ-रोइयाँ

    तखन बनय लागै छै कविता

    पाँखि पसारि

    नाचय लागै छै मयूर

    झनझनाबैए झिंगुर

    टर-टराबैए बेंग

    किलोल करैए चेङना-मेङना

    तखन बनय लागै छै कविता

    जखन सूपानय बरखामे

    हर जोतैत हरवाहा

    आड़ि छँटैत अनबाहा

    धान रोपैत जन-बोनिहारिनक

    पसेनासँ तर-बतर भेल

    गत्तर-गत्तर देखिकऽ

    गाछक तरमे छत्ता तनने

    गमछा ओढ़िकऽ ठाढ़ भेल गिरहत

    जाड़सँ थरथराबय लागैए

    तखन बनय लागै छै कविता

    जखन चिड़ै फोड़ैए अण्डा

    निकलैए गेल्ह

    गेल्हक फूटैए आँखि

    दर्शन करैए संसारक

    लोलसँ फनिगा पकड़ि लेबाक लेल

    उड़य लागैए फुर्र-फुर्र

    तखन बनय लागै छै कविता

    जखन भीड़ि जाइ छै

    आँखिसँ आँखि

    मिलि जाइ छै

    साँससँ साँस

    गलबहियाँ भेल

    ठोरसँ ठोर सटिकऽ

    एकात्म होअय सनक

    बनय लागै छै बात

    तखन बनय लागै छै कविता।

    स्रोत :
    • पुस्तक : झुझुआन होइत गाम (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 93)
    • रचनाकार : रघुनाथ मुखिया
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2018

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