घुप्प अन्हारक हाक्रोश
आ हमर अन्तसक उजहिया
सजीव माछक छटपटाहटि
ओकर अकुलाहटककेँ
अछि निसबद समर्थन हमर
छपकुइयाँमे ठिठुरैत माछ
ओकरा नहि छै बूझल
ओकर भीतर छै आगि
ओकर गलफरमे भरल बारुद
ओकरा कठुआय नहि देतै कहियो
मुदा
बरखो बरखक थरथरिये
थिकै ओकर निजगुत पहिचान
मौलाइत एकटा दिन
जखन ओ आपिस भेल
माथसँ चुबैत घामकेँ
चुत्तर परहक खौड़कीमे पोछैत
घरमे कौरो नहि भेटलै
ता एलै मालिकक फरमान
महापरबमे अखिनते पहुँचबाक
आ ओहो चलि देलक
पेटमे ममोड़ैत रस्सीकेँ जुन्ना बनाकऽ
'पिराइमरी इसकुल' पर
किसिम-किसिमके चप-उनार देखै ले
नमछुरुक्की पतियानीमे ठाढ़
निकलैत रहलै ओकर मुँह दऽ
अँतड़ीक जुन्ना
ओ ने रहल अपन आवेशकेँ
ता मालिकक एलै संकेत
एमकी एकरे
ओहो अपन ऊर्जा सबील
चलबऽ लागल ठप्पापर ठप्पा
जुन्ना निकलिकऽ बढ़ि रहल छलै
फेंच उठाकऽ ठाढ़ भऽ चुकल छलै
आ बगलमे
पड़ल छलै टुकुर-टुकुर देखैत
मालिकक लाल रंगमे डूमल लहास
तखने दूर क्षितिजपर चमकि उठल छलै
खतल एकटा चान!
- पुस्तक : एखन धरि (पृष्ठ 11)
- रचनाकार : अंशुमान सत्यकेतु
- प्रकाशन : नवारम्भ
- संस्करण : 2018
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