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एकलव्य छी हम

eklavya chhi hum

रामकृष्ण परार्थी

रामकृष्ण परार्थी

एकलव्य छी हम

रामकृष्ण परार्थी

और अधिकरामकृष्ण परार्थी

    हँ, हम एकलव्य छी

    अछोप, औंठा बला

    श्याम रंगक

    हमर निशाना अछि अचूक

    तरकसमे भरल अछि तीर

    लड़बाक लेल उत्साहित छी हम

    शूरवीरक उपाधि लेल लालायित छी हम

    मुदा दबा देल जायत हमर सभ प्रतिभा

    मटियामेट क' देल जायत हमर सभ परिश्रम

    जखन गुरु द्रोणाचार्य पुछता हमरासँ जाति

    क' देताह असफल

    फेर औंठा रहने आकि नहि रहने

    हमरा कहाँ कोनो पड़ैत अछि फर्क

    नियारने छथि पहिनहिसँ

    अर्जूने टा कहाओत शूरवीर

    यैह अछि शूद्र एकलव्य सभक तकदीर।

    स्रोत :
    • पुस्तक : प्रतिकार एखन बाँकी अछि (मैथिली कविता-संग्रह) (पृष्ठ 60)
    • रचनाकार : रामकृष्ण परार्थी
    • प्रकाशन : नवारम्भ, पटना/मधुबनी
    • संस्करण : 2022

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